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ध्रुव राठी के विवादित वीडियो पर Google की दिल्ली हाईकोर्ट में सफाई: भारत में ब्लॉक पर वैश्विक बैन नहीं, जानें पूरा मामला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read
नई दिल्ली । मंगलवार, 11 अगस्त 2026
प्रसिद्ध यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर ध्रुव राठी द्वारा मार्च 2026 में अपलोड किए गए एक वीडियो “Can Hindus Eat Beef? | Kerala Story 2 Exposed” को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हुआ।
अधिवक्ता अमिता सचदेवा द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि इस वीडियो में हिंदू देवी-देवताओं और सनातन धर्म से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को लेकर आपत्तिजनक और भ्रामक टिप्पणियां की गई हैं, जिससे करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

Google का दिल्ली हाईकोर्ट में क्या पक्ष रहा?

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वरना कांता शर्मा की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान Google (यूट्यूब) के विधिक प्रतिनिधियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। Google का पक्ष मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित रहा:
  • केंद्र सरकार की GAC के आदेश का अनुपालन: Google ने बताया कि केंद्र सरकार की Grievance Appellate Committee (GAC) द्वारा जारी निर्देशों का पालन करते हुए इस वीडियो को भारत में प्रतिबंधित (Withheld / Geo-blocked) कर दिया गया है।
  • भारत में ब्लॉक बनाम वैश्विक प्रतिबंध: Google ने अदालत के सामने स्पष्ट किया कि किसी वीडियो को भारत में एक्सेस से रोकना और उसे वैश्विक स्तर (Global Removal) पर यूट्यूब से पूरी तरह हटाना दो अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।
  • वैश्विक हटाने का मुद्दा अलग सुनवाई में: कंपनी का कहना था कि कंटेंट को पूरी दुनिया में हटाने (Global Takedown Injunction) का विषय हाईकोर्ट की डिविजन बेंच के समक्ष लंबित अलग कार्यवाही से जुड़ा हुआ है।

क्या हाईकोर्ट ने वीडियो को आधिकारिक रूप से ‘अपमानजनक’ माना?

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि अदालत ने अपनी ओर से इस वीडियो की सामग्री पर कोई अंतिम तथ्यात्मक या कानूनी फैसला नहीं सुनाया है।
  1. आरोप याचिकाकर्ता के हैं: याचिका में इस्तेमाल किए गए शब्द जैसे “देवी-देवताओं का अपमान” और “भावनाओं को ठेस पहुँचाना” याचिकाकर्ता (शिकायतकर्ता) द्वारा लगाए गए कानूनी आरोप हैं।
  2. कोर्ट का दायरा प्रशासनिक अनुपालन तक: इस सुनवाई में दिल्ली हाईकोर्ट का मुख्य ध्यान आईटी नियमों के तहत बनाई गई सरकारी समिति (GAC) के आदेशों और प्लेटफॉर्म (यूट्यूब/गूगल) द्वारा उनके अनुपालन पर था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. जिओ-ब्लॉकिंग (Geo-blocking) और ग्लोबल टेकडाउन (Global Takedown) में क्या अंतर है?

जिओ-ब्लॉकिंग का अर्थ है कि किसी विशेष देश (जैसे भारत) के आईपी एड्रेस वाले यूज़र्स के लिए वीडियो को एक्सेस-प्रतिबंधित कर दिया जाता है, लेकिन वह अन्य देशों में देखा जा सकता है। वहीं ग्लोबल टेकडाउन का मतलब है कि वीडियो को पूरे प्लेटफॉर्म से विश्वभर में हमेशा के लिए हटा देना।

2. Grievance Appellate Committee (GAC) क्या है?

GAC भारत सरकार द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (IT Rules, 2021) के तहत गठित एक अपीलीय समिति है, जो सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारियों के फैसलों के खिलाफ उपयोगकर्ताओं की अपीलों पर निर्णय लेती है।

3. क्या इस मामले में कोई आपराधिक कार्रवाई भी चल रही है?

जी हां, याचिकाकर्ता ने साकेत कोर्ट में भी शिकायत दर्ज कराई है, जहां पुलिस से एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी गई थी।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख दिल्ली हाईकोर्ट में हुई अदालती सुनवाई, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अदालती कार्यवाहियों और रिपोर्टों पर आधारित एक सूचनात्मक प्रस्तुति है। इसमें व्यक्त ‘अपमानजनक’ या ‘आपत्तिजनक’ शब्द याचिकाकर्ता की शिकायत के अंश हैं और इन्हें अदालत या किसी संस्था का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष न माना जाए।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।