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वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के लिए नए नियम जारी: अब ‘वेटिंग’ का झंझट खत्म, जानें कितना होगा किराया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. भारतीय रेलवे ने देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के परिचालन से पहले टिकट बुकिंग और किराए को लेकर नए दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी कर दिए हैं। रेलवे बोर्ड द्वारा स्पष्ट किया गया है कि ये ट्रेनें प्रीमियम श्रेणी की होंगी और इनमें यात्रा का अनुभव राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनों से भी अधिक आधुनिक होगा।

कंफर्म सीट की गारंटी: नहीं मिलेगी RAC और वेटिंग टिकट

नए नियमों के अनुसार, वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में RAC (Reservation Against Cancellation) या वेटिंग लिस्ट का कोई प्रावधान नहीं होगा। यात्रियों को केवल तभी टिकट जारी किया जाएगा जब बर्थ पूरी तरह से कंफर्म होगी। इसका उद्देश्य कोच के भीतर भीड़ को नियंत्रित करना और यात्रियों की निजता (Privacy) को बनाए रखना है। हालांकि, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए निर्धारित कोटा पहले की तरह जारी रहेगा।

न्यूनतम 400 किलोमीटर का किराया अनिवार्य

रेलवे ने इस ट्रेन के लिए ‘मिनिमम फेयर’ की नीति लागू की है। यदि कोई यात्री 100 या 200 किलोमीटर की यात्रा भी करता है, तो उसे कम से कम 400 किलोमीटर के बराबर का किराया देना होगा।

श्रेणीवार किराया दरें (बिना GST):

  • 3AC: ₹2.4 प्रति किलोमीटर (न्यूनतम किराया: ₹960)

  • 2AC: ₹3.1 प्रति किलोमीटर (न्यूनतम किराया: ₹1,240)

  • 1AC: ₹3.8 प्रति किलोमीटर (न्यूनतम किराया: ₹1,520)

राजधानी से थोड़ा महंगा होगा सफर

वंदे भारत स्लीपर का किराया मौजूदा प्रीमियम ट्रेनों (राजधानी/दुरंतो) की तुलना में अधिक रखा गया है। इसका मुख्य कारण ट्रेन की उच्च गति, आधुनिक सस्पेंशन सिस्टम और कोच के अंदर मिलने वाली विश्वस्तरीय सुविधाएँ हैं।

इसी महीने शुरू होगी पहली सेवा

भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन हावड़ा से गुवाहाटी मार्ग पर इसी महीने (जनवरी 2026) पटरी पर उतरने के लिए तैयार है। यह ट्रेन पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर देगी।

विशेषज्ञों की राय: रेलवे का यह कदम ‘कंफर्म यात्रा’ की दिशा में बड़ा बदलाव है। इससे टिकट दलालों पर लगाम लगेगी और वास्तविक यात्रियों को बिना किसी परेशानी के कंफर्म सीट मिल सकेगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।