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विजय हजारे ट्रॉफी: कर्नाटक ने मुंबई को हराकर सेमीफाइनल में बनाया स्थान, VJD मेथड से हुआ फैसला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. कर्नाटक ने विजय हजारे ट्रॉफी के रोमांचक क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मुंबई को हराकर सेमीफाइनल का टिकट कटा लिया है। बारिश से बाधित इस मैच में कर्नाटक की टीम खेल के हर क्षेत्र में मुंबई पर भारी पड़ी और अंततः VJD (वी. जयदेवन) प्रणाली के आधार पर विजेता घोषित की गई।

सिद्धेश लाड का संघर्ष, मुंबई ने बनाया सम्मानजनक स्कोर

टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मुंबई की टीम ने निर्धारित 50 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 232 रन बनाए। मुंबई की शुरुआत धीमी रही, लेकिन मध्यक्रम के बल्लेबाज सिद्धेश लाड ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 87 रनों की जुझारू पारी खेली। उनकी इस पारी की बदौलत ही मुंबई एक लड़ने लायक स्कोर तक पहुँच सकी।

कर्नाटक की घातक गेंदबाजी

कर्नाटक के गेंदबाजों ने मैच की शुरुआत से ही मुंबई के बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा। स्टार गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा और स्पिनर श्रेयस गोपाल ने घातक गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए 3-3 विकेट चटकाए। उनकी सधी हुई गेंदबाजी के कारण मुंबई के बल्लेबाज खुलकर रन नहीं बना सके।

बारिश का खलल और VJD मेथड का फैसला

233 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी कर्नाटक की टीम ने बेहद आक्रामक शुरुआत की। जब टीम ने 38 ओवरों में 4 विकेट खोकर 193 रन बना लिए थे, तभी तेज बारिश के कारण खेल रोकना पड़ा। काफी इंतजार के बाद भी जब मैदान दोबारा खेल के लिए तैयार नहीं हो सका, तो अंपायरों ने VJD मेथड का सहारा लिया।

निर्णय: गणना के बाद पाया गया कि कर्नाटक उस समय मुंबई के तुलनात्मक स्कोर से 55 रन आगे था। इस आधार पर कर्नाटक को आधिकारिक तौर पर विजेता घोषित कर दिया गया।

सेमीफाइनल की ओर कर्नाटक के कदम

इस शानदार जीत के साथ कर्नाटक अब सेमीफाइनल में प्रवेश कर चुका है। सेमीफाइनल में कर्नाटक का मुकाबला मंगलवार को होने वाले अन्य क्वार्टर फाइनल मैचों के विजेताओं में से किसी एक टीम से होगा। कर्नाटक की मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उन्हें टूर्नामेंट का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।