लोड हो रहा है...

राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका: कोर्ट ने कहा- “अपनी गलती की सजा भुगत रहे हैं अभिनेता”

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

मुंबई. बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से आज तल्ख टिप्पणी का सामना करना पड़ा। परिवार में शादी का हवाला देकर जमानत की गुहार लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने साफ कहा कि अभिनेता की वर्तमान स्थिति उनके अपने किए गए वादों को पूरा न करने का परिणाम है।

सुनवाई की मुख्य बातें

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान अभिनेता के पिछले आचरण पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत की प्रमुख टिप्पणियाँ निम्नलिखित रहीं:

  • दो दर्जन मौके गंवाए: कोर्ट ने रिकॉर्ड पर गौर करते हुए कहा कि राजपाल यादव को कम से कम 24 बार अपना बकाया चुकाने और किए गए वादे निभाने के मौके दिए गए थे, लेकिन वे हर बार नाकाम रहे।

  • खुद की गलती का परिणाम: पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, “आपके मुवक्किल जेल इसलिए गए क्योंकि उन्होंने अपना वादा पूरा नहीं किया। उन्होंने बार-बार बयान दिए कि वे पैसे देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।”

  • साख का संकट: अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में दिए गए आश्वासनों का पालन न करना एक गंभीर विषय है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद साल 2010 से जुड़ा है, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्देशन और निर्माण के लिए दिल्ली के एक व्यापारी से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। रकम वापस न कर पाने और समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने के कारण उन्हें पहले भी न्यायिक हिरासत का सामना करना पड़ा है।

अगला कदम

फिलहाल कोर्ट ने उनकी पिछली वादाखिलाफी को आधार बनाते हुए राहत देने में सख्ती दिखाई है। अदालत ने सहमति जताते हुए मामले को सोमवार के लिए स्थगित कर दिया है।  मामले की अगली कार्यवाही और औपचारिक आदेश पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

राजपाल यादव के अलावा हाल ही में अन्य बॉलीवुड सितारों पर भी अदालती गाज गिरी है, यहाँ क्लिक कर पढ़ें बॉलीवुड की लेटेस्ट खबरें।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।