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‘थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान’ की आरती बिराजदार और अंकिता बहुगुणा ने नवरात्रि पर महालक्ष्मी मंदिर में लिया आशीर्वाद

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

मुंबई, 12 अक्टूबर, 2026: नवरात्रि का समय ऐसा होता है, जब आस्था और भी मजबूत हो जाती है, प्रार्थनाएँ दिल के करीब महसूस होती हैं और मंदिर में दर्शन करना एक खास अनुभव बन जाता है। ‘थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान’ में वैदेही का किरदार निभा रहीं आरती बिराजदार और अनुप्रिया का किरदार निभा रहीं अंकिता बहुगुणा ने नवरात्रि के शुभ अवसर पर कोल्हापुर के प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में जाकर माँ का आशीर्वाद लिया। यह उनके लिए अपनी आस्था से जुड़ने का एक खूबसूरत अनुभव रहा। धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर में देशभर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। लोग यहाँ सुख, समृद्धि और जीवन में शक्ति पाने की कामना के साथ माँ के सामने प्रार्थना करते हैं।

मंदिर में दर्शन के अपने अनुभव के बारे में आरती बिराजदार ने कहा, “जब भी नवरात्रि का समय हो और आप कोल्हापुर में हों, तो महालक्ष्मी मंदिर में दर्शन जरूर करने चाहिए। इस मंदिर में कुछ खास है। जैसे ही आप मंदिर के अंदर जाते हैं, मन को शांति और सुकून महसूस होता है। महालक्ष्मी मंदिर महाराष्ट्र के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु माँ महालक्ष्मी का आशीर्वाद लेने आते हैं। लोगों की माँ पर गहरी आस्था है। उनका मानना है कि माँ जीवन की मुश्किलों से निकलने में रास्ता दिखाती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि लाती हैं। मुझे जब भी मौका मिलता है, मैं इस मंदिर में दर्शन करने जरूर आती हूँ। यहाँ आकर एक अलग तरह का सुकून मिलता है, जिसे शब्दों में बताना मुश्किल है। नवरात्रि के दौरान जब पूरा माहौल भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा होता है, तो यह अनुभव और भी खूबसूरत हो जाता है। एक अभिनेत्री के तौर पर शूटिंग और काम के कारण मेरे दिन काफी व्यस्त रहते हैं। ऐसे में, ये पल मुझे रुकने, अपने जीवन के लिए आभार जताने और खुद से जुड़ने का मौका देते हैं। मेरा मानना है कि आस्था हमें ताकत, उम्मीद और आगे बढ़ते रहने का हौंसला देती है। मैं इस विश्वास को अपने रोजमर्रा के जीवन में भी साथ लेकर चलती हूँ। मेरे लिए मंदिर आना सिर्फ आशीर्वाद लेने के बारे में नहीं है, बल्कि मन की शांति पाने और माँ ने मुझे जो कुछ दिया है, उसके लिए उनका धन्यवाद करने का भी एक तरीका है।”

अंकिता बहुगुणा के लिए यह यात्रा और भी खास रही, क्योंकि उन्हें एक बार फिर उस जगह पर जाने का मौका मिला, जहाँ वे पहले भी आ चुकी थीं। इस बार वे मंदिर के धार्मिक महत्व को पहले से बेहतर समझते हुए वहाँ पहुँचीं। अपना अनुभव साझा करते हुए, उन्होंने कहा, “मुझे हमेशा से नई जगहों पर घूमना और उन्हें जानना पसंद है। जब शो की शूटिंग शुरू होने के बाद मैं पहली बार कोल्हापुर आई थी, तब मैंने महालक्ष्मी मंदिर में दर्शन किए थे। उस समय मैंने मंदिर को देखा और वहाँ घूमी, लेकिन मुझे इसके इतिहास और माँ महालक्ष्मी के प्रति लोगों की गहरी आस्था के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। अब नवरात्रि के दौरान यहाँ दोबारा आना मेरे लिए बहुत खास है। सच कहूँ, तो मुझे ऐसा लगता है कि शायद माँ ने ही मुझे सही समय पर दोबारा अपने पास बुलाया है। इस मंदिर से लोगों की बहुत गहरी आस्था और भक्ति जुड़ी हुई है। नवरात्रि के दौरान यहाँ आकर यह अनुभव और भी खास हो जाता है। ऐसे शुभ अवसर पर दोबारा यहाँ आकर मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूँ। मुझे जिन जगहों पर जाने का मौका मिलता है, उनसे जुड़ी कहानियों और परंपराओं को जानना अच्छा लगता है। इससे वहाँ की संस्कृति और लोगों की मान्यताओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है। इस यात्रा ने मुझे यह भी याद दिलाया कि कई बार हम किसी जगह पर जाते हैं, लेकिन उसके पूरे महत्व को नहीं समझ पाते। फिर जीवन हमें उसी जगह पर दोबारा लेकर आता है, ताकि हम उसे एक नए नजरिए से महसूस कर सकें। मैं इस अवसर के लिए आभारी हूँ और उम्मीद करती हूँ कि माँ का आशीर्वाद, सकारात्मकता और अच्छी ऊर्जा हमेशा मेरे साथ रहेगी।

‘थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान’ हर सोमवार से शनिवार शाम 7:30 बजे, सिर्फ सन नियो पर देखें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।