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ऐतिहासिक सुनवाई: हेग स्थित ICJ में म्यांमार नरसंहार मामले पर अंतिम बहस शुरू

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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द हेग. अंतर्राष्ट्रीय न्याय के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय शुरू करते हुए, सोमवार 12 जनवरी 2026 को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने म्यांमार द्वारा रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ किए गए कथित नरसंहार मामले की पूर्ण सुनवाई (Merits Hearings) शुरू कर दी है। यह सुनवाई म्यांमार के सैन्य शासन और रोहिंग्या समुदाय के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

एक दशक की सबसे बड़ी कानूनी कार्यवाही

यह पिछले दस वर्षों में पहला ऐसा अवसर है जब विश्व की सर्वोच्च अदालत किसी नरसंहार (Genocide) मामले के ‘मेरिट्स फेज’ (तथ्यों की पूर्ण जांच) की सुनवाई कर रही है। कानूनविदों के अनुसार, यह वैश्विक मानवाधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।

गाम्बिया की ऐतिहासिक पहल

इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत पश्चिम अफ्रीकी देश गाम्बिया ने साल 2019 में की थी। गाम्बिया ने आरोप लगाया है कि म्यांमार ने 1948 के नरसंहार कन्वेंशन के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन किया है। गाम्बिया का तर्क है कि नरसंहार रोकना किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की जिम्मेदारी है।

बंद कमरों में गूँजेगी उत्तरजीवियों की आवाज

इस सुनवाई की सबसे बड़ी विशेषता रोहिंग्या उत्तरजीवियों (Survivors) की भागीदारी है। पहली बार, पीड़ित स्वयं अदालत के सामने अपनी आपबीती और हिंसा का विवरण साझा करेंगे। हालांकि, सुरक्षा कारणों और गवाहों की निजता को ध्यान में रखते हुए, गवाही के इन सत्रों को ‘बंद कमरों’ (Closed Sessions) में आयोजित किया जा रहा है।

सुनवाई का कार्यक्रम और म्यांमार का पक्ष

न्यायालय ने इस सुनवाई के लिए एक विस्तृत समय सारिणी तय की है:

  • सुनवाई की अवधि: 12 जनवरी से 29 जनवरी 2026 तक।

  • म्यांमार की दलीलें: म्यांमार, जिसने अब तक सभी आरोपों को सिरे से नकारा है, 16 से 20 जनवरी के बीच अपना बचाव पक्ष प्रस्तुत करेगा।

  • गाम्बिया का पक्ष: गाम्बिया के वकील हिंसा के सबूत और नरसंहार की मंशा को साबित करने वाले दस्तावेज पेश कर रहे हैं।

फैसले का महत्व

यद्यपि ICJ के पास अपने फैसलों को लागू करने के लिए कोई सेना नहीं है, लेकिन इसका फैसला म्यांमार पर भारी अंतर्राष्ट्रीय दबाव बना सकता है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में प्रतिबंधों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। पूरी दुनिया की नजरें अब 29 जनवरी तक चलने वाली इस कार्यवाही पर टिकी हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।