लोड हो रहा है...

बिना किसी अपेक्षा के ईश्वरीय कार्य में लगे कार्यकर्ताओं के प्रयास सफल और सिद्ध होते हैं – रामदत्त चक्रधर जी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

ग्वालियर. रविवार को जीवाजी विश्वविद्यालय मैदान में आयोजित महाविद्यालयीन विद्यार्थी शाखा व मिलन टोली एकत्रीकरण में  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर जी ने विद्यार्थियों से जीवन में सद्गुणों को विकसित कर भारत को स्वर्ग बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति विद्यार्थियों के चरित्र, संस्कार और सेवा भाव में निहित है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एमआईटीएस डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलगुरु आरके पंडित रहे, जबकि अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ग्वालियर विभाग के संघचालक प्रहलाद सबनानी ने की।

सह सरकार्यवाह जी ने बोध कथा के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन, सेवा और कर्तव्यबोध अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थी अपनी ऊर्जा और सामर्थ्य के साथ संघ के कार्य का विस्तार करें। संस्कारयुक्त सामर्थ्य से किया गया कार्य ही स्थायी और सार्थक होता है। इसके लिए संघ की शाखा में नियमित और अधिकतम उपस्थिति आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने हिन्दू समाज को संगठित करने के उद्देश्य से संघ की स्थापना की थी। संघ की शाखा केवल खेल या परेड का स्थान नहीं है, बल्कि यह समाज के सज्जनों की सुरक्षा का मौन संकल्प है। यह तरुणों को अनिष्ट व्यसनों से दूर रखने वाली संस्कार पीठ है, संकट के समय त्वरित और निरपेक्ष सहायता का आशा केंद्र है, महिलाओं की निर्भयता और सभ्य आचरण का भरोसा है तथा दुष्ट और देशद्रोही शक्तियों पर समाज की धाक स्थापित करने वाली शक्ति भी है।

- Advertisement -

उन्होंने कहा कि संघ की शाखा समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के लिए सुयोग्य कार्यकर्ता तैयार करने वाला एक प्रशिक्षण विद्यापीठ है। इसलिए आवश्यक है कि प्रत्येक क्षेत्र में शाखा के माध्यम से समाज पर सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे। हिन्दू समाज के सशक्त और दूरदर्शी बनने से ही भारत वैभवशाली होगा। जब कार्यकर्ता किसी कार्य में प्राणपण से जुटता है, तो ईश्वर भी उस कार्य की पूर्णता में सहयोग करता है। बिना किसी अपेक्षा के ईश्वरीय कार्य में लगे कार्यकर्ता के प्रयास न केवल सफल होते हैं, बल्कि सिद्ध भी होते हैं।

साभार : विश्व संवाद केंद्र

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।