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सोनी सब के ‘इत्ती सी खुशी’ में संजय के भावनात्मक पहलुओं को निभाते समय ऋषि सक्सेना ने लिया अमिताभ बच्चन के ‘दीवार’ के आइकॉनिक किरदार विजय से प्रेरणा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

अभिनेता ऋषि सक्सेना सोनी सब के शो इत्ती सी खुशी के सेट पर।

मुंबई, मार्च 2026: सोनी सब का शो इत्ती सी खुशी अन्विता (सुम्बुल तौकीर खान) की दिल छू लेने वाली कहानी दिखाता है। अन्विता एक ऐसी युवती है जिसने अपने भाई-बहनों की परवरिश की जिम्मेदारी उठाई है और साथ ही प्यार, जिम्मेदारी और परिवार की उलझनों को भी संभाल रही है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ रही है, अन्विता और उसके एक्स-हसबैंड संजय (ऋषि सक्सेना) के बीच का भावनात्मक रिश्ता और भी गहराई ले रहा है, जिसमें कई तीखे और दिल को छू लेने वाले पल सामने आ रहे हैं।

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आने वाले एपिसोड्स में दर्शक देखेंगे कि संजय अपने जज़्बात, असुरक्षाओं और अपने फैसलों के नतीजों से जूझ रहा है। संजय ऐसा किरदार है जो अपने मकसद को सही मानता है, लेकिन अक्सर ऐसे रास्ते चुनता है जो दूसरों को चोट पहुँचा सकते हैं। इस तरह के लेयर्ड किरदार को निभाने के लिए ऋषि सक्सेना ने ईमानदारी और गहराई से काम किया, ताकि संजय के अंदरूनी संघर्ष को सच्चाई के साथ दिखाया जा सके।

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ऋषि ने भारतीय सिनेमा के कुछ यादगार ग्रे किरदारों से भी प्रेरणा ली, खासकर अमिताभ बच्चन का दीवार वाला ‘विजय’, जिसकी भावनात्मक गहराई और नैतिक द्वंद आज भी दर्शकों को प्रभावित करती है।

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अपने अभिनय के पीछे की प्रेरणा के बारे में खुलकर बात करते हुए ऋषि सक्सेना ने साझा किया “जब संजय का ट्रैक खुलने लगा, मेरा सबसे बड़ा फोकस उसे पूरी ईमानदारी से निभाना था। संजय की खासियत यह है कि उसका मकसद साफ है और उसकी नज़र में सही भी है, लेकिन उसके चुने हुए रास्ते हमेशा सही नहीं होते। उसे सच्चाई से निभाने के लिए मुझे किरदार के लिए सहानुभूति पैदा करनी पड़ी, भले ही उसके काम सवाल खड़े करें। इस दौरान मैंने ऐसे आइकॉनिक ग्रे किरदारों के बारे में सोचा, जैसे अमिताभ बच्चन का दीवार वाला विजय, जो हमेशा सही रास्ते पर नहीं चलता लेकिन फिर भी दर्शकों के दिल में गहरी छाप छोड़ता है। आखिरकार मेरा फोकस संजय को ईमानदारी और विश्वास के साथ निभाने पर था, क्योंकि जब अप्रोच सही होती है तो किरदार अपने आप दर्शकों से जुड़ जाता है।”

देखिए इत्ती सी खुशी, हर सोमवार से शनिवार रात 9 बजे, सिर्फ सोनी सब पर।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।