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जालंधर BSF हेडक्वार्टर ब्लास्ट: दिल्ली से मुख्य संदिग्ध गिरफ्तार, पाकिस्तान और खालिस्तानी नेटवर्क का खुलासा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जालंधर । गुरुवार, 14 मई 2026 

जालंधर स्थित बीएसएफ (BSF) पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय के बाहर 5 मई की रात हुए आईईडी धमाके के मामले में सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और पंजाब पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में इस आतंकी साजिश के मुख्य संदिग्ध को दिल्ली से हिरासत में लिया गया है।

बस स्टैंड से दिल्ली तक पीछा और गिरफ्तारी

जांच एजेंसियों के अनुसार, संदिग्ध आरोपी ने वारदात को अंजाम देने के बाद जालंधर बस स्टैंड से बस पकड़ी थी। पुलिस ने तकनीकी इनपुट और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के आधार पर उसे ट्रैक किया। सूत्रों का कहना है कि आरोपी ने हमले से पहले दो दिनों तक इलाके की रेकी की थी। वह सफेद टी-शर्ट पहनकर आया था और कूड़ेदान या पास खड़ी स्कूटी के पास विस्फोटक रखकर फरार हो गया था।

पाकिस्तानी मास्टरमाइंड और ‘KLA’ का कनेक्शन

इस ब्लास्ट की जिम्मेदारी सोशल मीडिया पर ‘खालिस्तान लिबरेशन आर्मी’ (KLA) नामक संगठन ने ली है, जिसने इसे ‘ऑपरेशन नवा सवेर’ का नाम दिया। हालांकि, खुफिया एजेंसियों की जांच के केंद्र में पाकिस्तानी मास्टरमाइंड शहजाद भट्टी है। बताया जा रहा है कि भट्टी ने सोशल मीडिया के जरिए पंजाब के स्थानीय युवाओं को गुमराह कर इस हमले के लिए तैयार किया था।

ऑपरेशन में अब तक की बड़ी बातें:

  • 17 युवक हिरासत में: पंजाब के विभिन्न जिलों जैसे नकोदर, कपूरथला और अमृतसर से अब तक 17 संदिग्धों को पूछताछ के लिए उठाया गया है।

  • रिमोट कंट्रोल धमाका: फोरेंसिक रिपोर्ट और शुरुआती जांच के अनुसार, विस्फोट के लिए रिमोट कंट्रोल डिवाइस का इस्तेमाल किया गया था।

  • डिलीवरी बॉय की भूमिका: जांच में स्पष्ट हुआ है कि जिस स्कूटी में धमाका हुआ, वह एक डिलीवरी एजेंट की थी। डिलीवरी बॉय जांच में निर्दोष पाया गया है, उसकी स्कूटी का इस्तेमाल केवल कवर के तौर पर किया गया था।

सुरक्षा व्यवस्था और अलर्ट

इस घटना के बाद पंजाब और दिल्ली में हाई अलर्ट जारी है। विशेष रूप से सैन्य छावनियों और सरकारी मुख्यालयों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जालंधर पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब आरोपी से रिमांड के दौरान आगे के नेटवर्क और संभावित अगले ठिकानों के बारे में पूछताछ कर रही हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।