क्वेटा | शुक्रवार, 14 अगस्त 2026
पाकिस्तान का दक्षिण-पश्चिम प्रांत बलूचिस्तान इस समय गंभीर आंतरिक सुरक्षा संकट से गुजर रहा है। अगस्त 2026 में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य बलूच सशस्त्र संगठनों की गतिविधियों के जवाब में पाकिस्तानी सैन्य बलों ने व्यापक तलाशी और सैन्य अभियान शुरू किए हैं।
सुरक्षा अभियानों में मौतों का आंकड़ा
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12 अगस्त 2026: सुरक्षा बलों और उग्रवादियों की मुठभेड़ में 10 संदिग्ध अलगाववादी मारे गए।
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सुराब जिला हादसा: बम बनाते समय अचानक कार-बम में हुए विस्फोट से 3 नागरिकों और 8 उग्रवादियों की मौत हुई।
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11 अगस्त (पंजगुर): सेना के विशेष अभियान में 5 उग्रवादी ढेर किए गए और हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद हुआ।
14 अगस्त को ‘ब्लैक डे’ का आह्वान
पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस (14 अगस्त) को BLA ने ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाने की अपील की है। नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस समारोहों का बहिष्कार करने और विरोध में काले झंडे फहराने के निर्देश दिए गए हैं।
ध्यान दें: इससे पहले 11 अगस्त को बलूच राष्ट्रवादी समूहों ने ‘बलूचिस्तान स्वतंत्रता दिवस’ के तौर पर चिह्नित किया था। बलूच नेताओं का मानना है कि सैन्य कार्रवाई और मानवाधिकार हनन के कारण यह क्षेत्र अब पाकिस्तान का हिस्सा महसूस नहीं करता।
CPEC और चीनी नागरिकों की सुरक्षा पर असर
बलूचिस्तान में बढ़ता असंतोष सीधे तौर पर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और ग्वादर पोर्ट के भविष्य को प्रभावित कर रहा है:
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चीनी परियोजनाओं पर हमले: BLA और अन्य अलगाववादी समूह पहले भी CPEC प्रोजेक्ट्स और चीनी इंजीनियरों को निशाना बना चुके हैं।
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बीजिंग की चिंताएं: हिंसा के बढ़ते दायरे से चीन ने बहु-अरब डॉलर के अपने निवेश की सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
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आर्थिक नुकसान: प्रांत में जारी अस्थिरता से विदेशी निवेश पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. BLA (बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी) क्या है?
BLA एक प्रतिबंधित बलूच अलगाववादी सशस्त्र संगठन है जो पाकिस्तान से बलूचिस्तान की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करता है।
2. BLA 14 अगस्त को ‘ब्लैक डे’ क्यों मना रहा है?
बलूच राष्ट्रवादियों का आरोप है कि 1948 में बलूचिस्तान का पाकिस्तान में विलय जबरन कराया गया था, इसलिए वे पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस का विरोध करते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख आधिकारिक बयानों और रिपोर्ट किए गए घटनाक्रमों पर आधारित है। बलूचिस्तान के दूरस्थ इलाकों से स्वतंत्र सत्यापन और जमीनी आंकड़ों की पुष्टि करना चुनौतीपूर्ण रहता है।
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