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नेपाल बाढ़ और भूस्खलन 2026: 5,000 से अधिक लापता, DNA जांच से पहचान की जद्दोजहद जारी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

काठमांडू ।

नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के लगभग एक महीने बाद भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, इस त्रासदी में 1,399 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 5,200 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।

इस भयावह प्राकृतिक आपदा के बाद अब सबसे बड़ी प्रशासनिक और मानवीय चुनौती बरामद किए गए अज्ञात शवों की पहचान करना और पीड़ित परिवारों तक उनके परिजनों की सही जानकारी पहुंचाना बन गया है।

शवों की पहचान में देरी और DNA जांच की चुनौतियां

आपदा के बाद बरामद किए गए 1,399 शवों में से केवल 105 की ही पहचान कर उन्हें परिजनों को सौंपा जा सका है। बाकी 1,200 से अधिक शवों की पहचान के लिए नेपाल सरकार बड़े पैमाने पर DNA जांच अभियान चला रही है।

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  1. लैब और संसाधनों पर भारी दबाव: नेपाल के पास सीमित संख्या में DNA परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं। 1,206 अज्ञात शवों और 1,889 परिजनों के नमूनों का मिलान करने में काफी समय लग रहा है।
  2. शवों का क्षतिग्रस्त होना: हफ्तों तक पानी और मलबे में दबे रहने के कारण कई शव अत्यधिक क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे बायोमेट्रिक और DNA नमूने प्राप्त करना अत्यंत कठिन हो गया है।
  3. मानवीय संकट: हजारों परिवार अस्पतालों, राहत शिविरों और पुलिस स्टेशनों के चक्कर लगा रहे हैं। कई परिवारों के लिए अब अपनों के जीवित मिलने की उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं, और उनकी प्राथमिकता केवल अपनों का अंतिम संस्कार करना रह गई है।

 

दुर्गम क्षेत्रों में राहत और खोज अभियान

नेपाल के पहाड़ी और संकरे इलाकों में राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी हैं। काठमांडू घाटी और आसपास के जिलों में मलबे के भारी ढेर, टूटे पुल और बंद सड़कों के कारण राहत दलों को दूरदराज के गांवों तक पहुंचने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों और नदियों के बहाव क्षेत्र में दबे लोगों की तलाश के लिए नेपाली सेना, पुलिस और विशेष आपदा राहत दल ड्रोन, हेलीकॉप्टर और आधुनिक खोज उपकरणों की मदद ले रहे हैं।

आगे का रास्ता: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता

नेपाल में इस समय राहत सामग्री वितरण के साथ-साथ आपदा प्रबंधन के वैज्ञानिक पहलुओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डीएनए नमूनों की त्वरित जांच के लिए छिमेकी देशों और अंतरराष्ट्रीय forensic एजेंसियों का सहयोग लिया जाना चाहिए ताकि पीड़ित परिवारों का इंतजार खत्म हो सके।

संबंधित लेख एवं विश्वसनीय कवरेज (Relevant Links)

नेपाल आपदा और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण रिपोर्ट पढ़ने के लिए आप निम्नलिखित लेखों को देख सकते हैं:

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: नेपाल में अगस्त 2026 की बाढ़ में कितने लोग लापता और मृत घोषित किए गए हैं?

उत्तर: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1,399 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और लगभग 5,200 लोग अभी भी लापता हैं।

Q2: शवों की पहचान के लिए कौन सी विधि अपनाई जा रही है?

उत्तर: शवों की स्थिति बिगड़ने के कारण पहचान के लिए मुख्य रूप से परिजनों के साथ DNA सैंपलिंग और मिलान (DNA Profiling) की वैज्ञानिक विधि अपनाई जा रही है।

Q3: पहचान प्रक्रिया में इतना समय क्यों लग रहा है?

उत्तर: नमूनों की अत्यधिक संख्या, सीमित प्रयोगशाला क्षमता और पानी व मलबे में लंबे समय तक रहने के कारण शवों से DNA निष्कर्षण में आ रही तकनीकी कठिनाइयों की वजह से समय लग रहा है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख 16 सितंबर 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक रिपोर्टों और प्राथमिक आंकड़ों पर आधारित है। राहत और बचाव कार्यों के आगे बढ़ने के साथ सरकारी आंकड़ों में परिवर्तन हो सकता है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।