तेहरान | शुक्रवार, 14 अगस्त 2026
पश्चिम एशिया में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र भारत बनने जा रहा है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सितंबर 2026 में भारत की राजधानी नई दिल्ली का दौरा करने वाले हैं। वह भारत की मेजबानी में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
राष्ट्रपति पद का पदभार संभालने के बाद पेजेशकियन का यह पहला भारत दौरा होगा। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा न केवल बहुपक्षीय मंच BRICS के लिए, बल्कि भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य के लिए भी एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
18वां BRICS Summit: भारत की अध्यक्षता और थीम
भारत इस वर्ष 2026 में BRICS समूह की अध्यक्षता कर रहा है। सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहे इस शिखर सम्मेलन की आधिकारिक थीम तय की गई है:
“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”
भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान बहुपक्षीय सुधारों, डिजिटल इनोवेशन, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने और ग्लोबल साउथ (Global South) के हितों को प्रमुखता से उठाने पर बल दे रहा है।
भारत-ईरान संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह यात्रा?
पेजेशकियन की यह प्रस्तावित भारत यात्रा अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण समय पर हो रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, रेड सी (लाल सागर) और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षा की चुनौतियाँ वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रही हैं।
1. द्विपक्षीय संवाद और चाबहार पोर्ट
भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) और उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) जैसी रणनीतिक परियोजनाएँ दोनों देशों को व्यापारिक रूप से जोड़ती हैं। राष्ट्रपति पेजेशकियन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान इन व्यापारिक गलियारों और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर गहन चर्चा होने की संभावना है।
2. अक्टूबर 2024 (कजान) के बाद दूसरी मुलाकात
इससे पहले, अक्टूबर 2024 में रूस के कजान शहर में आयोजित BRICS सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन की पहली औपचारिक मुलाकात हुई थी। उसके बाद जून 2026 में दोनों नेताओं ने टेलीफोन पर वार्ता कर रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने पर सहमति जताई थी।
3. ईरानी विदेश मंत्री का पूर्व दौरा
जून 2026 में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने दिल्ली आए थे। उन्होंने स्पष्ट किया था कि पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान निकालने में भारत एक निष्पक्ष और प्रभावशाली मध्यस्थ भूमिका निभा सकता है।
BRICS में ईरान की बढ़ती भूमिका
ईरान को 1 जनवरी 2024 को BRICS समूह में औपचारिक रूप से पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। उसके साथ मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी जुड़े थे। वर्ष 2025 में इंडोनेशिया के शामिल होने के साथ ही BRICS के पूर्ण सदस्यों की संख्या बढ़कर 11 हो चुकी है।
11 देशों वाला यह विस्तारित समूह अब विश्व की लगभग 45% से अधिक आबादी और 35% से अधिक वैश्विक जीडीपी (GDP) का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें ईरान की उपस्थिति ऊर्जा सुरक्षा और मध्य पूर्व के व्यापारिक मार्गों के लिहाज से अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
सितंबर 2026 में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की नई दिल्ली यात्रा भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” और “एक्ट वेस्ट” नीति के संतुलन को दर्शाती है। BRICS मंच पर भारत और ईरान का आमने-सामने आना न केवल दोनों राष्ट्रों के आर्थिक और सुरक्षा हितों को गति देगा, बल्कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश भेजेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भारत कब आ रहे हैं?
उत्तर: राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सितंबर 2026 में भारत में आयोजित होने वाले 18वें BRICS Summit में भाग लेने नई दिल्ली आ सकते हैं।
Q2: 18वें BRICS Summit 2026 की थीम क्या है?
उत्तर: सम्मेलन की आधिकारिक थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है।
Q3: BRICS समूह में वर्तमान में कितने पूर्ण सदस्य देश हैं?
उत्तर: BRICS में वर्तमान में 11 पूर्ण सदस्य देश हैं: भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और इंडोनेशिया।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख उपलब्ध कूटनीतिक सूत्रों, आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट है। आधिकारिक दौरों के विस्तृत शेड्यूल और बैठकों के अंतिम कार्यक्रमों में विदेश मंत्रालयों के दिशा-निर्देशानुसार बदलाव संभव हैं।
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