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राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला: स्वदेशी जागरण मंच ने भारत में स्टारलिंक की सेवाओं को ब्लॉक करने का आग्रह किया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

नई दिल्ली।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच (SJM) ने केंद्र सरकार से अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक (Starlink) को भारत में व्यावसायिक अनुमति न देने और इसे ब्लॉक करने का आग्रह किया है। संगठन ने राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संरक्षण और रणनीतिक जोखिमों का हवाला देते हुए सरकार से अत्यधिक सतर्कता बरतने की अपील की है।

स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्वनी महाजन के अनुसार, देश के संवेदनशील संचार बुनियादी ढांचे (Telecom Infrastructure) को सुरक्षित रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। सैटेलाइट आधारित ब्रॉडबैंड सेवाओं के विस्तार के दौरान विदेशी कंपनियों के संचालन पर कड़ी निगरानी अनिवार्य है।

 

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स्वदेशी जागरण मंच द्वारा उठाई गई प्रमुख चिंताएं

एसजेएम (SJM) ने सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क की व्यापक पहुंच और इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर कई गंभीर रणनीतिक प्रश्न खड़े किए हैं:

  1. लेजर–बेस्ड उपग्रह लिंक (Laser Links) का जोखिम: स्टारलिंक के उपग्रह आपस में सीधे डेटा ट्रांसमिशन के लिए लेजर लिंक्स का उपयोग करते हैं। इससे भारतीय इंटरनेट ट्रैफिक भारत के स्थानीय लैंडिंग गेटवे से गुजरे बिना सीधे विदेशी बुनियादी ढांचे तक पहुँच सकता है, जिससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए कानूनी निगरानी (Lawful Interception) करना बेहद कठिन हो जाएगा।
  2. डेटा संप्रभुता और गोपनीयता: भारतीय नागरिकों और रणनीतिक संस्थानों का डेटा देश के भीतर ही सुरक्षित और स्टोर रहना चाहिए।
  3. गैर–कानूनी इस्तेमाल की आशंका: सीमावर्ती क्षेत्रों, संवेदनशील स्थानों या आपातकालीन स्थितियों में बिना सेंसर वाले सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल असामाजिक तत्वों या उग्रवादी समूहों द्वारा किए जाने का खतरा जताया गया है।

 

स्टारलिंक की भारत में भूमिका और तकनीकी उपयोगिता

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स, लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) उपग्रहों के माध्यम से हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट प्रदान करती है।

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  • सुदूर क्षेत्रों में कनेक्टिविटी: यह तकनीक उन पहाड़ी, जनजातीय और दूरदराज के क्षेत्रों में बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जहाँ पारंपरिक ऑप्टिकल फाइबर (Fiber Cable) या मोबाइल टावर पहुँचाना भौगोलिक दृष्टि से कठिन है।
  • कम लेटेंसी (Low Latency): LEO उपग्रह पृथ्वी के निकट (लगभग 550 किमी की ऊंचाई पर) होने के कारण पारंपरिक जियोस्टेशनरी सैटेलाइट्स की तुलना में बेहतर और तेज़ इंटरनेट गति प्रदान करते हैं।

 

सरकार के सामने चुनौती: सुरक्षा बनाम डिजिटल कनेक्टिविटी

भारत सरकार के सामने एक तरफ दूरदराज के क्षेत्रों तक डिजिटल इंडिया अभियान को पहुँचाने का लक्ष्य है, वहीं दूसरी ओर देश की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का समाधान करना आवश्यक है।

दूरसंचार विभाग (DoT) और भारतीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) ने सुरक्षा नियमों और स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए कड़े मापदंड निर्धारित किए हैं। किसी भी सैटेलाइट कंपनी को अंतिम परिचालन अनुमति मिलने से पहले गृह मंत्रालय (MHA) से सुरक्षा मंजूरी मिलना अनिवार्य है। SJM का तर्क है कि भारत को विदेशी विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी उपग्रह इंटरनेट क्षमताओं को विकसित करने पर बल देना चाहिए।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. स्वदेशी जागरण मंच ने भारत सरकार से क्या मांग की है?

उत्तर: स्वदेशी जागरण मंच (SJM) ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा संप्रभुता को खतरा बताते हुए एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में अनुमति न देने और इसकी सेवाओं को ब्लॉक करने की मांग की है।

Q2. स्टारलिंक सेवाओं को लेकर सुरक्षा एजेंसियों और SJM की मुख्य आपत्ति क्या है?

उत्तर: मुख्य आपत्ति उपग्रहों के बीच सीधे लेजर डेटा ट्रांसफर और स्थानीय गेटवे को बाईपास करने की संभावना को लेकर है, जिससे डेटा निगरानी और ट्रैक करना कठिन हो जाता है।

Q3. क्या स्टारलिंक को भारत में काम करने का लाइसेंस मिल चुका है?

उत्तर: स्टारलिंक को प्रारंभिक GMPCS लाइसेंस और IN-SPACe से सैटेलाइट नेटवर्क की सैद्धांतिक मंजूरी मिली है, लेकिन अंतिम स्पेक्ट्रम आवंटन और गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी (Security Clearance) अभी प्रक्रियाधीन है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख सार्वजनिक समाचार स्रोतों, आधिकारिक बयानों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित एक सूचनात्मक विश्लेषण है। सैटेलाइट ब्रॉडबैंड नीति और कंपनियों के लाइसेंसिंग पर अंतिम निर्णय भारत सरकार की नियामकीय समीक्षा और सुरक्षा एजेंसियों के आकलन पर निर्भर करता है।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।