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आईडीबीआई बैंक के निजीकरण को मंजूरी, फेयरफैक्स खरीदेगी 60.72% हिस्सेदारी, 52,878 करोड़ रुपये का सौदा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
11 Min Read

मुंबई।

केंद्र सरकार ने आईडीबीआई बैंक में बहुमत हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की कंपनी M/s 10955230 Canada Inc. को आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी है। सौदे का मूल्य करीब 52,878 करोड़ रुपये है।

फेयरफैक्स की ओर से 81 रुपये प्रति शेयर की पेशकश की गई है। यह दो स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों से तय किए गए 75.99 रुपये प्रति शेयर के आधार मूल्य से अधिक है। सरकार के मुताबिक यह सौदा पूरा होने के बाद भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश होगा।

 

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सरकार और एलआईसी बेचेंगी 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी

आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री में केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी, जबकि भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी।

इस तरह फेयरफैक्स की कंपनी को बैंक की कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलेगी। सौदा पूरा होने के बाद केंद्र सरकार के पास 15 प्रतिशत और एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 34 प्रतिशत होगी।

 

81 रुपये प्रति शेयर क्यों महत्वपूर्ण है?

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आईडीबीआई बैंक के लिए फेयरफैक्स की 81 रुपये प्रति शेयर की बोली को मूल्यांकन प्रक्रिया में उचित माना गया है। स्वतंत्र एजेंसियों ने अलग-अलग तरीकों से बैंक का मूल्यांकन किया था और दोनों के आकलन का औसत 75.99 रुपये प्रति शेयर रहा।

सरकार ने बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव को देखते हुए केवल शेयर बाजार के भाव के आधार पर मूल्य तय करने के बजाय बैंक की परिसंपत्तियों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के तुलनात्मक मूल्यांकन सहित अन्य मानकों को भी ध्यान में रखा।

 

पहले भी हुई थी बोली की कोशिश

आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री की प्रक्रिया अक्टूबर 2022 में शुरू हुई थी। शुरुआती प्रक्रिया में कई संभावित खरीदारों ने रुचि दिखाई थी। बाद में फेयरफैक्स और अमीरात एनबीडी प्रमुख दावेदारों के रूप में सामने आए।

वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों पक्षों की शुरुआती बोलियां सरकार द्वारा तय 94.42 रुपये प्रति शेयर के आरक्षित मूल्य से कम रही थीं। इसके बाद उन बोलियों को मंजूरी नहीं दी गई और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दोबारा प्रयास किया गया।

बाद में वित्त वर्ष 2026-27 में योग्य बोलीदाताओं से बेहतर प्रस्ताव मांगे गए। इसी प्रक्रिया में फेयरफैक्स की 81 रुपये प्रति शेयर की बोली सफल रही।

 

फेयरफैक्स को क्यों चुना गया?

फेयरफैक्स ने प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में सबसे उपयुक्त प्रस्ताव पेश किया। हालांकि, सौदा पूरा होने से पहले खरीदार को भारतीय रिजर्व बैंक की निर्धारित नियामकीय शर्तों का पालन करना होगा।

खरीदार को अपनी योग्यता और अन्य आवश्यक जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी तथा नियामकीय शर्तों को पूरा करने की कार्ययोजना भी देनी होगी।

 

आईडीबीआई बैंक की वित्तीय स्थिति में बड़ा सुधार

आईडीबीआई बैंक की वित्तीय स्थिति पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुई है। बैंक का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात सितंबर 2018 में 31.78 प्रतिशत था, जो मार्च 2026 में घटकर 2.32 प्रतिशत रह गया।

इसी अवधि में शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात 17.30 प्रतिशत से घटकर 0.15 प्रतिशत हो गया। बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात भी 2018 के 6.22 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2026 में 26.65 प्रतिशत हो गया।

वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक ने करीब 9,513 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। 30 सितंबर 2026 तक बैंक का कुल कारोबार करीब 6.27 लाख करोड़ रुपये था, जो एक साल पहले की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है।

 

कभी गंभीर वित्तीय दबाव में था बैंक

आईडीबीआई बैंक को मई 2017 में भारतीय रिजर्व बैंक की सुधारात्मक कार्रवाई व्यवस्था के तहत रखा गया था। इसका मुख्य कारण बैंक की खराब परिसंपत्ति गुणवत्ता और नुकसान था।

वित्तीय स्थिति में सुधार के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने 10 मार्च 2021 को बैंक को इस व्यवस्था से बाहर कर दिया। इसके बाद बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता और पूंजी स्थिति में लगातार सुधार देखने को मिला।

 

ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?

हिस्सेदारी बिक्री से आईडीबीआई बैंक का स्वामित्व ढांचा और प्रबंधन नियंत्रण बदल सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों के बैंक खाते या जमा तुरंत प्रभावित होंगे।

बैंक की सामान्य सेवाएं नियामकीय व्यवस्था के तहत जारी रहेंगी। जमा, ऋण, डिजिटल बैंकिंग और अन्य सेवाओं से जुड़े ग्राहकों के मौजूदा संबंध बैंक के नए स्वामित्व ढांचे के बावजूद नियामकीय नियमों के अनुसार संचालित होंगे।

 

सरकार के पास फिर भी रहेगी हिस्सेदारी

यह सौदा सरकार की पूरी तरह बैंक से बाहर निकलने की प्रक्रिया नहीं है। हिस्सेदारी बिक्री के बाद भी केंद्र सरकार के पास 15 प्रतिशत और एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस कदम को केवल रणनीतिक विनिवेश के बजाय रणनीतिक पुनर्गठन के तौर पर बताया है। इसका कारण यह है कि सरकार और एलआईसी बिक्री के बाद भी बैंक में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बनाए रखेंगे।

 

भारत के बैंकिंग क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सौदा?

आईडीबीआई बैंक में बहुमत हिस्सेदारी किसी विदेशी रणनीतिक निवेशक को मिलने से भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी पूंजी और वैश्विक बैंकिंग अनुभव की भूमिका बढ़ सकती है।

सौदा पूरा होने के बाद फेयरफैक्स को बैंक का प्रबंधन नियंत्रण हासिल होगा। इससे बैंक की कारोबार विस्तार रणनीति, तकनीकी निवेश, ग्राहक सेवाओं और परिचालन दक्षता में आने वाले वर्षों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, इन बदलावों का वास्तविक प्रभाव नए प्रबंधन की रणनीति और नियामकीय मंजूरियों पर निर्भर करेगा।

 

सौदा कब तक पूरा होगा?

मंत्रिमंडलीय मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन अंतिम सौदे के लिए अभी निर्धारित नियामकीय और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। सरकार के अनुसार खरीदार को भारतीय रिजर्व बैंक की आवश्यक प्रक्रियाओं और अन्य शर्तों का पालन करना होगा।

इसलिए मंत्रिमंडल की मंजूरी को सौदे की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा सकता है, लेकिन हिस्सेदारी का अंतिम हस्तांतरण सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही होगा।

 

आईडीबीआई बैंक के इतिहास पर एक नजर

आईडीबीआई की स्थापना 1964 में विकास वित्तीय संस्था के रूप में हुई थी। बाद में 2004 में इसे वाणिज्यिक बैंक में बदला गया।

भारतीय रिजर्व बैंक ने जनवरी 2019 से आईडीबीआई बैंक को निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में वर्गीकृत किया था। इसके बावजूद केंद्र सरकार और एलआईसी की बड़ी हिस्सेदारी के कारण बैंक में सार्वजनिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रही।

 

निष्कर्ष

आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी फेयरफैक्स की कंपनी को बेचने की मंजूरी भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के लिए बड़ा घटनाक्रम है। करीब 52,878 करोड़ रुपये के इस सौदे से फेयरफैक्स बैंक में बहुमत हिस्सेदारी हासिल करने की स्थिति में आ जाएगा।

सरकार और एलआईसी के पास बिक्री के बाद भी 34 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। बैंक की वित्तीय स्थिति में पिछले वर्षों में हुए सुधार और नए रणनीतिक निवेशक के आने से आईडीबीआई बैंक के भविष्य की दिशा पर बाजार और बैंकिंग क्षेत्र की नजर रहेगी।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आईडीबीआई बैंक की कितनी हिस्सेदारी फेयरफैक्स खरीदेगी?

फेयरफैक्स की कंपनी आईडीबीआई बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी।

आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बेचने पर कितनी रकम मिलेगी?

प्रस्तावित सौदे का मूल्य करीब 52,878 करोड़ रुपये है।

सरकार आईडीबीआई बैंक की कितनी हिस्सेदारी बेच रही है?

केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है।

एलआईसी कितनी हिस्सेदारी बेचेगी?

एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी।

सौदे के बाद सरकार के पास कितनी हिस्सेदारी रहेगी?

सौदा पूरा होने के बाद केंद्र सरकार के पास 15 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी।

सौदे के बाद एलआईसी के पास कितनी हिस्सेदारी होगी?

एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी।

फेयरफैक्स ने आईडीबीआई बैंक के लिए कितनी बोली लगाई?

फेयरफैक्स की सफल बोली 81 रुपये प्रति शेयर रही।

क्या आईडीबीआई बैंक के ग्राहकों पर तत्काल असर पड़ेगा?

हिस्सेदारी बिक्री से बैंक का स्वामित्व और प्रबंधन बदल सकता है, लेकिन ग्राहकों की सामान्य बैंकिंग सेवाएं नियामकीय व्यवस्था के तहत जारी रहेंगी।

क्या आईडीबीआई बैंक का नाम बदलेगा?

नाम में बदलाव को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित समझौतों और नियामकीय प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी। फिलहाल बैंक के नाम में तत्काल बदलाव की घोषणा नहीं हुई है।

क्या सौदा पूरी तरह हो चुका है?

मंत्रिमंडलीय मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन अंतिम सौदे के लिए आवश्यक नियामकीय और अन्य प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं।

 

अस्वीकरण

यह समाचार उपलब्ध सरकारी जानकारी और 14 अक्टूबर 2026 तक सामने आए विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। हिस्सेदारी बिक्री और स्वामित्व हस्तांतरण से संबंधित अंतिम स्थिति नियामकीय मंजूरियों, समझौतों और आधिकारिक प्रक्रियाओं के पूरा होने पर निर्भर करेगी। निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले पाठकों को स्वतंत्र रूप से आधिकारिक और वित्तीय जानकारी की जांच करनी चाहिए।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।