नई दिल्ली|
दिल्ली के ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर बिना प्रशासनिक अनुमति के प्रदर्शन करने और शांति व्यवस्था प्रभावित करने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के वरिष्ठ नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को स्थानीय मजिस्ट्रेट अदालत ने 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश जारी किया है। वहीं, इसी मामले में हिरासत में लिए गए पार्टी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके (Personal Bond) पर रिहा कर दिया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर जंतर-मंतर पर होने वाले राजनीतिक प्रदर्शनों और प्रशासनिक प्रतिबंधों को लेकर बहस छिड़ गई है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, 13 अक्टूबर 2026 की सुबह सीजेपी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता जंतर-मंतर क्षेत्र पहुंचे थे। पुलिस के अनुसार, इस क्षेत्र में धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू थी और किसी भी प्रकार के सार्वजनिक विरोध या सभा की पूर्व प्रशासनिक अनुमति नहीं ली गई थी।
पुलिस का आरोप है कि कार्यकर्ताओं ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया, नारेबाजी की और राष्ट्रीय ध्वज फहराया। सुरक्षाकर्मियों द्वारा रोके जाने के बाद भी जब स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया, तो पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
पुलिस की दलील और कानूनी रुख
अदालत में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने तर्क दिया कि दोनों नेताओं की गतिविधियों से राजधानी में सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की गंभीर आशंका थी।
पुलिस ने अपनी दलील में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे:
- शर्तों का उल्लंघन: नेताओं को पहले भी शांति और सदाचार बनाए रखने की कानूनी शर्तों के साथ चेतावनी देकर छोड़ा गया था।
- पुनः भीड़ जुटाने का प्रयास: चेतावनी के बावजूद दोबारा लोगों को एकत्रित कर प्रदर्शन आयोजित करने की कोशिश की गई।
- सुरक्षा एवं यातायात: जंतर-मंतर क्षेत्र में बिना अनुमति के प्रदर्शन से आम जनता की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
इसी आधार पर अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल भेजने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 अक्टूबर 2026 को तय की गई है।
CJP का पलटवार: आरोपों को बताया बेबुनियाद
दूसरी ओर, सीजेपी की कानूनी टीम और पार्टी नेताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है। पार्टी का कहना है कि:
- नेताओं ने किसी भी प्रकार के शांति बांड (Peace Bond) का उल्लंघन नहीं किया है।
- पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों को अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
- लोकतांत्रिक ढांचे में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना और राष्ट्रीय ध्वज फहराना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
जंतर–मंतर पर प्रदर्शन और प्रशासनिक प्रतिबंधों का इतिहास
दिल्ली का जंतर-मंतर दशकों से सामाजिक, राजनीतिक और नागरिक संगठनों के विरोध-प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र रहा है। हालांकि, दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था, वीआईपी मूवमेंट और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए यहाँ समय-समय पर कड़े दिशा-निर्देश और प्रतिबंध लागू किए जाते रहे हैं। सीजेपी नेताओं की हिरासत का ताजा मामला इसी प्रशासनिक और कानूनी पृष्ठभूमि का हिस्सा है।
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बार–बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: सौरव दास और आशुतोष रांका को कितने दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है?
उत्तर: अदालत ने दोनों CJP नेताओं को 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है।
Q2: इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
उत्तर: इस मामले की अगली कानूनी सुनवाई 19 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
Q3: अजिंक्य शिंदे को किस आधार पर रिहा किया गया?
उत्तर: अजिंक्य शिंदे को अदालत द्वारा निजी मुचलके (Personal Bond) पर रिहा किया गया है।
Q4: जंतर–मंतर पर कार्रवाई का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रशासनिक प्रतिबंधों/धारा 163 का उल्लंघन कर बिना अनुमति के प्रदर्शन करने, नारेबाजी करने और भीड़ जुटाने के कारण यह कार्रवाई की गई।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख प्रस्तुत समाचार एवं उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियों के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें उल्लिखित कानूनी प्रक्रियाएं और तथ्य संबंधित पक्षों द्वारा अदालत एवं पुलिस के समक्ष दी गई दलीलों पर आधारित हैं।

