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म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन: एस. जयशंकर का अमेरिका को कड़ा संदेश—’रणनीतिक स्वायत्तता’ से समझौता नहीं करेगा भारत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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म्यूनिख. रूस से कच्चे तेल की खरीद और अमेरिका के साथ हुए हालिया ट्रेड समझौते को लेकर जारी विवादों के बीच, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने म्यूनिख सिक्योरिटी समिट में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) से समझौता नहीं करेगा और ऊर्जा सुरक्षा पर फैसले पूरी तरह स्वतंत्र होंगे।

विवाद की जड़: क्या भारत अमेरिका के सामने झुक गया?

हाल ही में अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को एक ट्रेड डील के बाद हटा लिया था। इस डील के तुरंत बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया कि वाशिंगटन ने भारत से ‘अतिरिक्त रूसी तेल’ न खरीदने की प्रतिबद्धता हासिल कर ली है। इस बयान के बाद भारत में विपक्षी दलों ने सरकार को घेरते हुए इसे अमेरिका के सामने ‘आत्मसमर्पण’ करार दिया।

विदेश मंत्री का ‘दो टूक’ जवाब

जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ चर्चा के दौरान जयशंकर ने इन कयासों पर विराम लगाते हुए कहा:

“हम रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। यह हमारे इतिहास और विकास का एक अभिन्न अंग है। तेल कंपनियों के फैसले व्यावसायिक होते हैं, न कि राजनीतिक।”

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय कंपनियां उपलब्धता, लागत और जोखिमों को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेती हैं, ठीक वैसे ही जैसे यूरोप की कंपनियां करती हैं।

मुख्य बिंदु: क्या बदलेगी भारत की नीति?

  • राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी साफ किया कि ऊर्जा खरीद का आधार केवल राष्ट्रीय जरूरतें होंगी।

  • व्यावसायिक स्वतंत्रता: भारत ने यह संकेत दिया है कि तेल की खरीद मार्केट की कीमतों और डिस्काउंट पर निर्भर करेगी, न कि किसी तीसरे देश के दबाव पर।

  • अमेरिकी दबाव: वाशिंगटन यूक्रेन युद्ध के चलते मॉस्को पर प्रतिबंधों को कड़ा कर रहा है और चाहता है कि भारत रूस से दूरी बनाए।

विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयशंकर का यह बयान वैश्विक स्तर पर यह संदेश देने के लिए है कि भारत एक ‘स्वतंत्र ध्रुव’ के रूप में कार्य कर रहा है। हालांकि अमेरिका ने टैरिफ हटाकर भारत को राहत दी है, लेकिन भारत ने बदले में अपनी ऊर्जा सुरक्षा की चाबी किसी और को नहीं सौंपी है।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।