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म्यूनिख में पाकिस्तान सेना प्रमुख की ‘बेइज्जती’? जानें वायरल वीडियो का सच

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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म्यूनिख. जर्मनी में आयोजित प्रतिष्ठित म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस (MSC) में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की मौजूदगी विवादों और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर जहाँ पाकिस्तान इसे वैश्विक स्तर पर अपनी भागीदारी के तौर पर देख रहा है, वहीं दूसरी ओर कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई एक घटना का वीडियो वायरल होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की ‘बेइज्जती’ के दावे किए जा रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में देखा जा सकता है कि जब पाकिस्तान के जनरल असीम मुनीर कॉन्फ्रेंस वेन्यू के भीतर प्रवेश कर रहे थे, तब वहां तैनात एक महिला सुरक्षा अधिकारी ने उन्हें रोक लिया। सुरक्षा अधिकारी ने मुनीर से उनका आइडेंटिटी कार्ड (ID Card) सीधा करने और उसे ठीक से दिखाने का निर्देश दिया।

इस छोटी सी घटना को सोशल मीडिया पर “प्रोटोकॉल की कमी” और “पाकिस्तान की साख में गिरावट” के तौर पर देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि एक आर्मी चीफ को इस तरह साधारण सुरक्षा जांच के लिए रोकना उनकी अंतरराष्ट्रीय हैसियत को दर्शाता है।

सिंधी संगठनों का कड़ा विरोध

सिंध के राजनीतिक संगठन जय सिंध मुत्ताहिदा महाज (JSMM) ने जनरल मुनीर की इस कॉन्फ्रेंस में मौजूदगी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

  • प्रोटेस्ट और आपत्ति: JSMM के सदस्यों ने वेन्यू के बाहर प्रदर्शन किया और पाकिस्तान में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों को उठाया।

  • वैश्विक संस्थाओं को पत्र: संगठन के चेयरमैन शफी बुरफत ने संयुक्त राष्ट्र (UN), यूरोपीय संघ (EU) और जर्मन सरकार को आधिकारिक पत्र लिखकर पाकिस्तान को न्योता दिए जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ और पीड़ितों के लिए एक ‘सदमा’ करार दिया।

तथ्यों की स्पष्टता

यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि हालांकि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में उन्हें ‘फील्ड मार्शल’ कहा जा रहा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर असीम मुनीर पाकिस्तान के सेना प्रमुख (General) हैं। पाकिस्तान के सैन्य इतिहास में अब तक केवल जनरल अयूब खान ही ‘फील्ड मार्शल’ के पद तक पहुंचे थे।

निष्कर्ष

म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस दुनिया भर के नेताओं और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच संवाद का एक बड़ा मंच है। लेकिन पाकिस्तान के लिए यह दौरा कूटनीतिक उपलब्धियों से ज्यादा ‘आईडी कार्ड’ विवाद और मानवाधिकारों के खिलाफ हुए प्रदर्शनों की वजह से चर्चा में बना हुआ है।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।