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जय सोमनाथ: संजय लीला भंसाली और केतन मेहता की ऐतिहासिक फिल्म का बड़ा ऐलान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. भारतीय सिनेमा के दो दिग्गज फिल्मकार—अपनी भव्यता के लिए मशहूर संजय लीला भंसाली और ऐतिहासिक कहानियों के माहिर केतन मेहता—एक बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘जय सोमनाथ’ के लिए एक साथ आए हैं। यह फिल्म भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली और भावनात्मक अध्यायों में से एक को बड़े पर्दे पर पेश करने का वादा करती है।

विनाश पर विजय की गाथा

‘जय सोमनाथ’ की कहानी दर्शकों को 1025–1026 ईस्वी के उस दौर में ले जाएगी, जब गजनी के महमूद ने गुजरात के प्रतिष्ठित सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था। फिल्म केवल हमले और लूटपाट की घटना तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह मंदिर के पुनर्निर्माण और भारतीय सभ्यता के अटूट साहस की कहानी बयां करेगी।

विशेष रूप से, इस ऐतिहासिक घटना को 1000 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में यह फिल्म भारत की कभी न झुकने वाली हिम्मत और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक के रूप में पेश की जा रही है।

दो ‘क्रिएटिव दिग्गजों’ का महा-संगम

यह पहली बार है जब भंसाली और मेहता जैसे दो अलग-अलग शैली के धुरंधर एक साथ काम कर रहे हैं।

  • भंसाली प्रोडक्शंस: अपनी फिल्मों में जादुई दुनिया और विजुअल भव्यता (Grandeur) के लिए जाना जाता है।

  • माया मूवीज (केतन मेहता): ऐतिहासिक सटीकता और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सिनेमाई अनुभव के लिए मशहूर है।

चूंकि दोनों ही फिल्ममेकर मूल रूप से गुजरात से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए माना जा रहा है कि वे इस कहानी के साथ न्याय करने में पूरी तरह सफल होंगे।

मुख्य विवरण: लेखन, निर्देशन और रिलीज

  • लेखन और निर्देशन: इस फिल्म की कमान खुद केतन मेहता संभाल रहे हैं।

  • प्रोडक्शन: फिल्म का निर्माण भंसाली प्रोडक्शंस और माया मूवीज के साझा बैनर तले किया जा रहा है।

  • रिलीज डेट: फिल्म को भव्य स्तर पर 2027 में रिलीज करने की तैयारी है।

विशेष टिप्पणी: हैरत की बात यह है कि सोमनाथ मंदिर जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अब तक भारतीय सिनेमा में कोई बड़ी फिल्म नहीं बनी थी। ‘जय सोमनाथ’ के साथ यह कमी अब दूर होने जा रही है।

matribhumisamachar.com/latest-news

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।