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FSSAI का बड़ा फैसला: अब बार-बार फूड लाइसेंस रिन्यू कराने की टेंशन खत्म, जानें नए नियम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश समेत देश भर के लाखों खाद्य कारोबारियों (Food Business Operators) के लिए केंद्र सरकार और FSSAI ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब ढाबा चलाने वालों, रेस्तरां मालिकों और यहाँ तक कि ठेले-खोमचे लगाने वाले छोटे दुकानदारों को हर साल लाइसेंस रिन्यू कराने की लंबी और जटिल प्रक्रिया से मुक्ति मिल गई है।

नए नियमों के अनुसार, अब फूड लाइसेंस और पंजीकरण को ‘स्थायी वैधता’ (Permanent Validity) दे दी गई है। आइए जानते हैं कि 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले इन बदलावों का आपके बिजनेस पर क्या असर पड़ेगा।

1. लाइसेंस की ‘एक्सपायरी डेट’ खत्म, पर जिम्मेदारी जारी

अब तक व्यापारियों को 1 से 5 साल की अवधि के लिए लाइसेंस मिलता था, जिसके बाद उन्हें फिर से आवेदन करना पड़ता था। देरी होने पर भारी जुर्माना और दोबारा कागजी कार्रवाई की मुसीबत रहती थी।

  • नया नियम: अब लाइसेंस एक बार बनेगा और हमेशा के लिए मान्य रहेगा।

  • शर्त: लाइसेंस को एक्टिव रखने के लिए व्यापारियों को हर साल निर्धारित वार्षिक शुल्क जमा करना होगा और एनुअल रिटर्न दाखिल करना होगा। ऐसा न करने पर लाइसेंस स्वतः (Automatically) निलंबित हो जाएगा।

2. टर्नओवर सीमा में भारी बढ़ोतरी: करोड़ों का बिजनेस अब ‘बेसिक’ श्रेणी में

सरकार ने छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए टर्नओवर (सालाना कमाई) की सीमा में कई गुना इजाफा किया है:

श्रेणीपुरानी टर्नओवर सीमानई टर्नओवर सीमा (1 अप्रैल 2026 से)
बेसिक रजिस्ट्रेशन₹12 लाख तक₹1.5 करोड़ तक
राज्य स्तर का लाइसेंस₹12 लाख से ₹5 करोड़ तक₹1.5 करोड़ से ₹50 करोड़ तक
केंद्रीय (Central) लाइसेंस₹5 करोड़ से ऊपर₹50 करोड़ से ऊपर

इसका मतलब है कि अब ₹1 करोड़ सालाना कमाने वाला छोटा दुकानदार भी मात्र ‘बेसिक रजिस्ट्रेशन’ पर काम कर सकेगा, जिसे प्राप्त करना बेहद आसान है।

3. स्ट्रीट वेंडर्स और ठेले वालों के लिए ‘डीम्ड’ व्यवस्था

नगर निगम या स्ट्रीट वेंडर्स अधिनियम, 2014 के तहत रजिस्टर्ड ठेले-खोमचे और फेरीवालों को अब FSSAI के दफ्तर के चक्कर नहीं काटने होंगे। उन्हें अब ‘डीम्ड रजिस्टर्ड’ माना जाएगा। यानी उनका नगर निगम वाला पंजीकरण ही खाद्य सुरक्षा के लिए पर्याप्त माना जा सकता है, जिससे ‘इंस्पेक्टर राज’ पर लगाम लगेगी।

4. रिस्क-बेस्ड निरीक्षण और थर्ड पार्टी ऑडिट

नए नियमों में भ्रष्टाचार कम करने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए ‘जोखिम आधारित प्रणाली’ (Risk-based system) अपनाई जाएगी।

  • अब हर दुकान पर रैंडम छापेमारी के बजाय उन प्रतिष्ठानों का निरीक्षण होगा जहाँ मानकों के उल्लंघन का जोखिम ज्यादा है।

  • बड़े प्रतिष्ठानों के लिए थर्ड पार्टी फूड सेफ्टी ऑडिट की व्यवस्था भी की गई है, जिससे सरकारी हस्तक्षेप कम होगा।

5. क्या पुराने लाइसेंस अभी भी चलेंगे?

व्यापारियों को यह ध्यान रखना होगा कि यदि उनके मौजूदा लाइसेंस की वैधता 31 मार्च 2026 तक है, तो उन्हें मौजूदा व्यवस्था के अनुसार एक बार रिन्यू कराना होगा। इसके बाद ही वे स्थायी वैधता वाली नई व्यवस्था के दायरे में आ पाएंगे।

विशेषज्ञ की राय: व्यापारिक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि 12 लाख की सीमा को बढ़ाकर 1.5 करोड़ करना छोटे व्यापारियों को मुख्यधारा में लाएगा। हालांकि, व्यापारियों को स्वच्छता और गुणवत्ता के मानकों (Safety Standards) पर अब और भी ज्यादा ध्यान देना होगा क्योंकि डिजिटल मॉनिटरिंग और रिटर्न फाइलिंग अब अनिवार्य है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।