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बांग्लादेश के लिए ‘संजीवनी’ बनी भारत की मैत्री पाइपलाइन: अप्रैल तक पहुंचेगा 45,000 टन अतिरिक्त डीजल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

ढाका. दक्षिण एशिया में ऊर्जा कूटनीति के एक नए अध्याय में, भारत अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश को भीषण ऊर्जा संकट से उबारने के लिए आगे आया है। बांग्लादेश ने अपनी चरमराई अर्थव्यवस्था और ईंधन की कमी को थामने के लिए भारत से अप्रैल तक 45,000 टन अतिरिक्त डीजल आयात करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

मैत्री पाइपलाइन: संकट में बना ‘सुरक्षा कवच’

इस पूरी आपूर्ति की सबसे अहम कड़ी ‘भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन’ (IBFP) है। मार्च 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा उद्घाटन की गई यह 131.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन अब बांग्लादेश के लिए ‘इकोनॉमिक लाइफलाइन’ साबित हो रही है।

  • सप्लाई का गणित: हाल ही में पाइपलाइन के जरिए 5,000 टन डीजल भेजा गया था।

  • अगला कदम: 18 और 19 मार्च को 5,000 टन की एक और खेप रवाना होगी।

  • बड़ा लक्ष्य: 40,000 टन अतिरिक्त आपूर्ति के लिए कागजी कार्रवाई अंतिम चरण में है, जो अप्रैल के अंत तक बांग्लादेश पहुंच जाएगी।

क्यों गहराया बांग्लादेश में संकट?

पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण ईंधन का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

  1. बिजली कटौती (Load Shedding): डीजल की कमी से बिजली संयंत्र प्रभावित हुए, जिससे ढाका समेत कई शहरों में घंटों बिजली गुल रहने लगी।

  2. गारमेंट सेक्टर पर मार: बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ ‘गारमेंट इंडस्ट्री’ को जनरेटर चलाने के लिए डीजल नहीं मिल पा रहा था, जिससे उत्पादन ठप होने की कगार पर था।

  3. राशनिंग और भीड़: स्थिति इतनी खराब थी कि सरकार को पेट्रोल पंपों पर राशनिंग लागू करनी पड़ी थी, जिसे अब भारत से मिली मदद के आश्वासन के बाद हटाया गया है।

रेलवे बनाम पाइपलाइन: भारत का मास्टरस्ट्रोक

इससे पहले भारत से डीजल की आपूर्ति पश्चिम बंगाल से मालगाड़ियों के जरिए की जाती थी, जो न केवल खर्चीली थी बल्कि उसमें समय भी अधिक लगता था। अब असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी से सीधे बांग्लादेश के पार्बतीपुर डिपो तक पाइपलाइन से सप्लाई हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है: “पाइपलाइन के माध्यम से परिवहन न केवल सस्ता है, बल्कि यह सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल भी है। यह भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (पड़ोसी पहले) नीति का एक ठोस उदाहरण है।”

भविष्य की राह और क्षेत्रीय सहयोग

भारत से मिलने वाली इस अतिरिक्त मदद से न केवल बांग्लादेश के उद्योगों को गति मिलेगी, बल्कि वहां के घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें स्थिर होने की भी उम्मीद है। यह कदम चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।