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बॉलीवुड के बड़े सितारे भी बने डिजिटल स्कैम का शिकार! शोहरत भी नहीं बचा सकी डिजिटल स्कैम से

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

मुंबई, अक्टूबर, 2026: फिल्मों और वेब सीरीज में दिखाए गए स्कैम दर्शकों को हमेशा से आकर्षित करते रहे हैं। जामतारा: सबका नंबर आएगा में फोन के जरिए होने वाली ठगी से लेकर स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी में बड़े वित्तीय घोटाले की कहानी तक, मनोरंजन जगत ने धोखाधड़ी के कई रूप पर्दे पर दिखाए हैं। लेकिन, जब ऐसी घटनाएँ असल जिंदगी में बॉलीवुड सितारों और लोकप्रिय चेहरों के साथ होती हैं, तो यह कहानी सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि एक गंभीर चेतावनी बन जाती है।

हाल ही में अभिनेत्री कीर्ति कुल्हारी ने अपने क्रेडिट कार्ड से 2.43 लाख रुपए के कथित अनधिकृत अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन का मामला साझा किया। हिंदुस्तान टाइम्स को अगस्त 2026 में दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान उन्हें अपने कार्ड से डॉलर में भुगतान होने का नोटिफिकेशन मिला। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में मोबाइल पर हमारी जिंदगी से जुड़ी लगभग हर जानकारी मौजूद है और ऐसे में धोखाधड़ी को पहचानना आसान नहीं है।

वहीं, कंटेंट क्रिएटर अंकुश बहुगुणा ने जनवरी 2025 में डिजिटल अरेस्ट स्कैम का अपना अनुभव साझा किया था। उनके मुताबिक, ठगों ने उन्हें करीब 40 घंटे तक मानसिक दबाव में रखा। इस घटना ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के मानसिक और आर्थिक प्रभाव को सामने रखा।

टेलीविजन कलाकार पूजा बनर्जी और कुणाल वर्मा ने भी एक वित्तीय धोखाधड़ी में अपनी बचत गंवाने की बात कही थी। पूजा ने उस मुश्किल दौर को याद करते हुए कहा था कि पिछले दो-तीन महीने उनके परिवार के लिए बेहद कठिन रहे और उन्हें आगे क्या होगा, इसका अंदाजा नहीं था। एक अन्य मामले में टीवी अभिनेता राहुल सिंह तोमर ने कथित तौर पर एक अनजान व्यक्ति के फोन कॉल के बाद 85,000 रुपए गंवाने की जानकारी दी थी। एबीपी लाइव के अनुसार, उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपना ओटीपी या यूपीआई पिन साझा नहीं किया था।

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पर्दे पर स्कैम, असल जिंदगी में सबक

जामतारा, स्कैम 1992 और स्कैम 2003: द टेल्गी स्टोरी जैसी सीरीज ने धोखाधड़ी की अलग-अलग कहानियों को दर्शकों तक पहुँचाया है। लेकिन, असल जिंदगी में ठगी किसी स्क्रिप्ट के मुताबिक नहीं होती। कभी एक फोन कॉल, कभी अनजान ट्रांजैक्शन और कभी भरोसेमंद व्यक्ति के जरिए लोग इसका शिकार बन जाते हैं।

अक्टूबर को साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में, मनोरंजन जगत से सामने आए ये मामले याद दिलाते हैं कि डिजिटल धोखाधड़ी किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। शोहरत और पहचान के बावजूद कोई भी व्यक्ति इसका शिकार बन सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह लेख केवल सामान्य सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसमें दी गई घटनाएँ, नाम और आंकड़े विभिन्न समाचार रिपोर्टों एवं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मीडिया स्रोतों पर आधारित हैं।

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इस लेख का उद्देश्य किसी व्यक्ति, ब्रांड या संस्थान की छवि को नुकसान पहुँचाना नहीं है, बल्कि पाठकों को साइबर सुरक्षा और डिजिटल धोखाधड़ी के प्रति जागरूक करना है। यदि आप किसी भी प्रकार की वित्तीय या साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो तुरंत अपने संबंधित बैंक को सूचित करें और आधिकारिक साइबर अपराध हेल्पलाइन (1930) या वेबसाइट (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज कराएं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।