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ट्रंप का ‘गाजा पीस बोर्ड’: 19 फरवरी को पहली बैठक, यूरोपीय देशों ने बनाई दूरी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा के पुनर्निर्माण और वैश्विक शांति के लिए गठित ‘गाजा पीस बोर्ड’ (BoP) की पहली औपचारिक बैठक 19 फरवरी को होने जा रही है। हालांकि, बैठक से ठीक दो दिन पहले ट्रंप की इस महत्वाकांक्षी कूटनीतिक पहल को यूरोप में कड़े विरोध और उदासीनता का सामना करना पड़ रहा है।

पश्चिमी शक्तियों का किनारा

ट्रंप प्रशासन ने इस बैठक के लिए दुनिया भर के लगभग 60 देशों को न्योता भेजा था। लेकिन कूटनीतिक हलकों में उस समय हलचल मच गई जब फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली और स्वीडन जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने से इनकार कर दिया।

  • विरोध का कारण: यूरोपीय देशों का मानना है कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) की भूमिका को कमजोर कर सकता है। इटली ने “संवैधानिक बाधाओं” का हवाला दिया है, जबकि अन्य देशों ने बोर्ड की भारी-भरकम 1 अरब डॉलर की सदस्यता फीस और इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

  • यूरोप से समर्थन: 15 आमंत्रित यूरोपीय देशों में से अब तक केवल हंगरी, बुल्गारिया और कोसोवो ने ही बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है।

एशिया का रुख: भारत और चीन अब भी मौन

एशियाई देशों की भागीदारी को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है:

  • पाकिस्तान और इंडोनेशिया: इन दोनों देशों ने बैठक में शामिल होने के सकारात्मक संकेत दिए हैं। इंडोनेशिया ने गाजा में मानवीय मिशन के लिए 8,000 सैनिकों तक की सहायता का प्रस्ताव भी रखा है।

  • भारत, चीन और जापान: इन प्रमुख एशियाई शक्तियों ने अभी तक अपनी भागीदारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। भारत ने शांति प्रयासों का समर्थन तो किया है, लेकिन इस विशेष मंच में शामिल होने पर चुप्पी साधे रखी है।

ट्रंप का ‘मास्टर प्लान’ और $5 बिलियन का वादा

इस कूटनीतिक गतिरोध के बावजूद, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया है कि सदस्य देशों ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर (लगभग ₹41,000 करोड़) से अधिक की राशि देने का वादा किया है।

“यह मंच न केवल गाजा का पुनर्निर्माण करेगा, बल्कि भविष्य के वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार करेगा।” — डोनाल्ड ट्रंप

प्रमुख एजेंडा:

  1. Gaza Reconstruction Fund: $5 बिलियन के सहायता पैकेज की औपचारिक घोषणा।

  2. Security Force: गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक ‘अंतरराष्ट्रीय स्थायीकरण बल’ का गठन।

  3. Hamas Demilitarization: स्थायी शांति के लिए हमास के पूर्ण विसैन्यीकरण की शर्त।

19 फरवरी को वॉशिंगटन के ‘डोनाल्ड जे. ट्रंप शांति संस्थान’ में होने वाली यह बैठक ट्रंप की विदेश नीति की एक बड़ी परीक्षा होगी। क्या वे पश्चिमी सहयोगियों के बिना इस बोर्ड को एक प्रभावी अंतरराष्ट्रीय संस्था बना पाएंगे, यह आने वाले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।