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पुलकित सम्राट ने ‘ग्लोरी’ ट्रेलर लॉन्च पर मशहूर बॉक्सर नीरज गोयत के साथ लाइव बॉक्सिंग मैच कर रचा इतिहास

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read
रियल और रील के बीच की सीमाओं को तोड़ते हुए, अभिनेता पुलकित सम्राट ने आज ‘ग्लोरी’ के ट्रेलर लॉन्च पर प्रोफेशनल बॉक्सर नीरज गोयत के साथ एक जबरदस्त लाइव बॉक्सिंग मुकाबला कर सभी को चौंका दिया।
यह हाई-एनर्जी फेस-ऑफ केवल एक प्रमोशनल स्टंट नहीं था, बल्कि एक असली और दमदार मुकाबला था, जिसने दर्शकों को हैरान कर दिया और इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कड़ी तैयारी, अनुशासन और जज़्बे का परिचय देते हुए पुलकित न सिर्फ पूरे आत्मविश्वास के साथ रिंग में उतरे, बल्कि नीरज गोयत जैसे अनुभवी खिलाड़ी के साथ कदम से कदम मिलाकर मुकाबला भी किया।
फिलहाल इस उपलब्धि के साथ, पुलकित सम्राट प्रोफेशनल बॉक्सर के साथ लाइव बॉक्सिंग मैच खेलने वाले पहले भारतीय अभिनेता बन गए हैं, जो भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। वैश्विक स्तर पर, अब वह टॉम हार्डी और जैक गिलेनहाल जैसे चुनिंदा कलाकारों में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने ऐसा कारनामा किया है और साथ ही यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे विश्व के तीसरे अभिनेता बन गए हैं।
हालांकि बॉक्सिंग के इस पल को और खास बनाया रिंग में दिखाई गई खेल भावना और आपसी सम्मान। नीरज गोयत, जो अपनी बेहतरीन तकनीक और अंतरराष्ट्रीय पहचान के लिए जाने जाते हैं, ने मुकाबले के बाद पुलकित की मेहनत, हिम्मत और उस समर्पण की काफी सराहना की, जो एक अभिनेता के लिए असली फाइट सीन में उतरने के लिए जरूरी होता है।
दिलचस्प बात यह रही कि इस मुकाबले ने ‘ग्लोरी’ के ट्रेलर लॉन्च को एक अलग ही ऊर्जा और वास्तविकता दी, जो इस सीरीज़ के एक्शन-पैक्ड और इंटेंस अनुभव की झलक पेश कर रहा है। इसके अलावा इस तरह की साहसिक पहल के जरिए टीम ने फिल्म प्रमोशन के पारंपरिक तरीकों को नई परिभाषा दी है।
गौरतलब है कि रिंग में पुलकित का प्रदर्शन न सिर्फ ‘ग्लोरी’ के लिए उनके दर्शकों की उत्सुकता को बढ़ा रहा है, बल्कि उन्हें एक ऐसे कलाकार के रूप में स्थापित कर रहा है, जिनकी अपने काम के प्रति प्रतिबद्धता स्क्रीन से आगे जाकर असल जिंदगी में भी नजर आती है।
फिलहाल इस ऐतिहासिक पल के साथ, ‘ग्लोरी’ ने अपनी शुरुआत एक दमदार अंदाज में कर दी है, जिसे दर्शक और इंडस्ट्री लंबे समय तक याद रखेंगे।
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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।