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भारत-न्यूजीलैंड FTA: 20 अक्टूबर से सस्ते होंगे कुछ उत्पाद, जानिए किन सेक्टरों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
7 Min Read

नई दिल्ली।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) के अमल में आने का समय आ गया है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत आयात शुल्क (Customs Duty) में छूट की पहली अधिसूचना जारी कर दी गई है, जो 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रही है।

इस समझौते के क्रियान्वयन से भारतीय बाजार में चुनिंदा न्यूजीलैंड उत्पादों के प्रवेश की लागत कम होने की उम्मीद है, वहीं भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार तैयार होगा।

 

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किन न्यूजीलैंड उत्पादों पर मिलेगी कस्टम ड्यूटी में राहत?

20 अक्टूबर से लागू होने वाली शुरुआती शुल्क रियायतों की सूची में सीमित उत्पाद शामिल किए गए हैं:

  • भेड़ का मांस (Mutton/Sheep Meat): इस पर आयात शुल्क को घटाकर शून्य (0%) करने का प्रावधान किया गया है।
  • कीवी फल (Kiwi Fruit): कीवी पर शुरुआती रियायती सीमा शुल्क 15 प्रतिशत निर्धारित किया गया है।
  • वाइन और मनुका शहद (Wine & Manuka Honey): इन प्रीमियम उत्पादों को टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) और निर्धारित शर्तों के तहत आयात शुल्क में विशेष छूट दी जाएगी।

क्या खुदरा (Retail) कीमतें तुरंत कम होंगी?

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क घटने का मतलब यह नहीं है कि ये उत्पाद दुकानों में तुरंत सस्ते हो जाएंगे। अंतिम खुदरा कीमत पर केवल कस्टम ड्यूटी का प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि निम्नलिखित कारक भी मुख्य भूमिका निभाते हैं:

  1. माल ढुलाई (Freight Charges)
  2. समुद्री या हवाई बीमा (Insurance Cost)
  3. कोल्ड-चेन एवं भंडारण लागत (Cold Storage)
  4. वितरण एवं खुदरा मार्जिन (Retail Margins)
  5. विनिमय दर (Currency Exchange Rate)

 

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भारतीय निर्यातकों और विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा लाभ

इस मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का सबसे अहम पक्ष भारतीय निर्यातकों के लिए न्यूजीलैंड में मिलने वाली व्यापक बाजार पहुंच (Duty-Free Market Access) है।

न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों के लिए अपने दरवाजे खोलेगा, जिससे विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा:

  • कपड़ा और परिधान (Textiles & Apparel)
  • चमड़ा एवं जूते (Leather & Footwear)
  • रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery)
  • इंजीनियरिंग उत्पाद (Engineering Goods)
  • प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (Processed Food)

न्यूजीलैंड में भारतीय विनिर्मित वस्तुओं पर टैरिफ खत्म होने से घरेलू सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच प्राप्त होगा।

 

भारतीय किसानों और डेयरी क्षेत्र के हित सुरक्षित

व्यापार समझौतों के दौरान अक्सर भारतीय डेयरी और कृषि क्षेत्र में विदेशी प्रतिस्पर्धा का डर बना रहता है। लेकिन केंद्र सरकार ने इस FTA में अपने संवेदनशील क्षेत्रों का पूरा ध्यान रखा है:

भारत ने अपने घरेलू किसानों और अमूल जैसे डेयरी ब्रांड्स/उद्योगों को अचानक आयात में होने वाली वृद्धि से बचाने के लिए संवेदनशील डेयरी और कृषि उत्पादों को रियायती सूची से पूरी तरह बाहर रखा है।

इसलिए, न्यूजीलैंड से आने वाले सभी डेयरी या कृषि उत्पाद सस्ते होंगे—यह धारणा पूरी तरह गलत है।

 

20 अरब डॉलर का दीर्घकालिक निवेश और रोजगार सृजन

यह FTA केवल वस्तुओं और सेवाओं के लेन-देन (Goods and Services Trade) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत व्यापक आर्थिक साझेदारी की नींव रखी गई है:

  • न्यूजीलैंड की ओर से अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर ($20 Billion) के प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की प्रतिबद्धता जताई गई है।
  • यह निवेश भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, एग्री-टेक और सर्विस सेक्टर में क्षमता निर्माण और नए रोजगार (Jobs Creation) पैदा करने में मदद करेगा।

 

मुख्य अंश (Key Takeaways)

  • कार्यान्वयन तिथि: भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए समझौते के तहत पहली सीमा शुल्क (Customs Duty) कटौती 20 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी।
  • आयात शुल्क में छूट: कीवी फल, वाइन, मनुका शहद और भेड़ के मांस जैसे चुनिंदा उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी घटाई जा रही है।
  • भारतीय निर्यात को बढ़ावा: टेक्सटाइल, लेदर, ज्वैलरी और इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार शुल्क-मुक्त उपलब्ध होगा।
  • डेयरी व कृषि सुरक्षा: भारत ने अपने संवेदनशील डेयरी और कृषि उत्पादों को रियायती सूची से बाहर रखा है।
  • 20 अरब डॉलर का निवेश: न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में भारी निवेश प्रतिबद्धता निभाएगा।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: भारत–न्यूजीलैंड FTA की पहली सीमा शुल्क कटौती कब से लागू हो रही है?

उत्तर: पहली सीमा शुल्क कटौती 20 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी।

प्रश्न 2: किन न्यूजीलैंड उत्पादों पर शुल्क कम या शून्य किया जा रहा है?

उत्तर: शुरुआती चरण में भेड़ के मांस (शुल्क 0%), कीवी फल (रियायती शुल्क 15%), वाइन और मनुका शहद (TRQ शर्तों के अधीन) पर शुल्क में राहत दी जा रही है।

प्रश्न 3: क्या न्यूजीलैंड से आने वाला दूध और पनीर भी सस्ता होगा?

उत्तर: नहीं। भारत ने घरेलू किसानों और डेयरी उद्योग के हितों की रक्षा के लिए संवेदनशील डेयरी और मुख्य कृषि उत्पादों को इस समझौते में शुल्क रियायतों से बाहर रखा है।

प्रश्न 4: इस समझौते से भारतीय उद्योगों को क्या लाभ होगा?

उत्तर: भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में बिना किसी शुल्क के कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग और प्रोसेस्ड फूड बेचने की व्यापक पहुंच मिलेगी।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख विशुद्ध रूप से सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के आधिकारिक एवं उपलब्ध समाचार विवरणों के आधार पर तैयार किया गया है। उत्पादों की खुदरा कीमतें बाजार की परिस्थितियों, विनिमय दर और स्थानीय करों पर निर्भर करती हैं।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।