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रवि किशन का बड़ा कदम: टीवी कलाकारों के लिए पेंशन और सस्ते घर की मांग, लोकसभा में पेश करेंगे बिल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. भोजपुरी और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और गोरखपुर से भाजपा सांसद रवि किशन ने मनोरंजन उद्योग के उन कलाकारों के लिए आवाज उठाई है जो चकाचौंध के पीछे अक्सर आर्थिक तंगी और अनिश्चितता का जीवन जीते हैं। रवि किशन ने लोकसभा में एक प्राइवेट मेंबर बिल (निजी विधेयक) पेश करने की तैयारी पूरी कर ली है, जिसमें विशेष रूप से टीवी कलाकारों और ‘साइड आर्टिस्ट’ के लिए पेंशन, जमीन और सस्ते आवास की मांग की गई है।

क्यों पड़ी इस बिल की जरूरत?

मुंबई में अपनी आगामी फिल्म ‘भाभीजी घर पर हैं – फन ऑन द रन’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रवि किशन ने इस पहल की जानकारी दी। उन्होंने कहा:

“सिनेमा की चकाचौंध में हम सिर्फ लीड एक्टर्स को देखते हैं, लेकिन उन कैरेक्टर आर्टिस्ट और साइड एक्टर्स को भूल जाते हैं जो सिर्फ एक या दो डायलॉग बोलकर अपना गुजारा करते हैं। अक्सर काम न मिलने पर उनके पास इलाज तक के पैसे नहीं होते। मेरा लक्ष्य उनके लिए एक सुरक्षा कवच तैयार करना है।”

बिल की प्रमुख मांगें:

रवि किशन द्वारा प्रस्तावित इस बिल में कलाकारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए निम्नलिखित प्रावधानों का सुझाव दिया गया है:

  1. पेंशन स्कीम: उम्रदराज और आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों के लिए मासिक पेंशन।

  2. किफायती आवास: बेघर कलाकारों के लिए सरकारी जमीन या कम दरों पर फ्लैट मुहैया कराना।

  3. मेडिकल सुविधाएं: कलाकारों और उनके परिवारों के लिए मुफ्त या रियायती स्वास्थ्य सेवाएं।

  4. नेशनल अवॉर्ड में नई श्रेणी: टीवी सीरियल के कलाकारों के लिए भी ‘नेशनल अवॉर्ड’ में अलग कैटेगरी जोड़ने की मांग।

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स्मृति ईरानी का दिया उदाहरण

समारोह के दौरान जब उनसे टीवी कलाकारों को मिलने वाले सम्मान पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार और पीएम मोदी ने हमेशा प्रतिभा का सम्मान किया है। टीवी से निकलकर स्मृति ईरानी कैबिनेट मंत्री बनीं, और कई टीवी कलाकार आज सांसद व विधायक के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं।

क्या है ‘प्राइवेट मेंबर बिल’?

संसद का वह सदस्य जो मंत्री नहीं है, यदि कोई विधेयक पेश करता है तो उसे ‘प्राइवेट मेंबर बिल’ कहा जाता है। रवि किशन इससे पहले भी जनसंख्या नियंत्रण और भोजपुरी भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने जैसे गंभीर विषयों पर निजी विधेयक ला चुके हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।