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कानपुर मेट्रो: नौबस्ता तक जल्द दौड़ेगी ट्रेन, 25 फरवरी से दोनों ट्रैक पर टेस्ट रन की तैयारी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर. शहर की लाइफलाइन बनने जा रही कानपुर मेट्रो के प्रथम कॉरिडोर (IIT से नौबस्ता) का काम अब अपने निर्णायक चरण में पहुँच गया है। कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता के बीच निर्माणाधीन हिस्से में डाउन ट्रैक का काम लगभग पूरा हो चुका है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) आगामी 25 फरवरी के बाद इस पूरे खंड के दोनों ट्रैक पर टेस्ट रन शुरू करने की व्यापक तैयारी कर रहा है।

एलीवेटेड स्टेशनों पर सुविधाओं का जाल

बारादेवी से नौबस्ता के बीच स्थित सभी पाँच एलीवेटेड स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं को अंतिम रूप दे दिया गया है। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार:

  • इन स्टेशनों पर कुल 40 लिफ्ट लगाई जा चुकी हैं।

  • सभी लिफ्टों का लोड टेस्टिंग ट्रायल भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

  • यात्रियों की सुगम आवाजाही के लिए 15 एस्केलेटर भी स्थापित किए जा चुके हैं।

अंडरग्राउंड स्टेशनों में भी काम तेज

सुरंग के अंदर बने झकरकटी और ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशनों पर भी काम युद्धस्तर पर चल रहा है। यहाँ की प्रगति रिपोर्ट इस प्रकार है:

  • एस्केलेटर: झकरकटी में प्रस्तावित 8 में से 7 एस्केलेटर लग चुके हैं।

  • लिफ्ट: कुल 6 लिफ्ट में से 4 को इंस्टॉल किया जा चुका है।

सफर होगा आसान

कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता का हिस्सा शुरू होने से दक्षिण कानपुर के लाखों निवासियों को सीधे रेलवे स्टेशन तक बिना जाम के पहुँचने की सुविधा मिलेगी। झकरकटी बस अड्डे पर मेट्रो कनेक्टिविटी मिलने से अंतर्राज्यीय यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

अधिकारियों का कहना है कि टेस्ट रन सफल होने के बाद सेफ्टी कमिश्नर का निरीक्षण होगा, जिसके बाद इस रूट को आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।