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बड़गाम-कटड़ा ट्रेन विस्तार: एक हफ्ते में 4000 से अधिक यात्रियों ने किया सफर, विस्टाडोम बना आकर्षण का केंद्र

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जम्मू: जम्मू-कश्मीर में पर्यटन और स्थानीय आवागमन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे द्वारा उठाया गया कदम मील का पत्थर साबित हो रहा है। बड़गाम-बनिहाल विशेष ट्रेन का विस्तार माता वैष्णो देवी कटड़ा तक किए जाने के बाद, यात्रियों में इसे लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

11 फरवरी से शुरू हुए इस विस्तार के मात्र एक सप्ताह (17 फरवरी तक) के भीतर ही आंकड़ों ने इस सेवा की सफलता की पुष्टि कर दी है।

हजारों यात्रियों की पहली पसंद बनी ट्रेन

रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात दिनों में 4,000 से अधिक यात्रियों ने बड़गाम से कटड़ा के बीच सामान्य श्रेणी में सफर किया है। यह ट्रेन न केवल घाटी के लोगों को माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए सीधा मार्ग प्रदान कर रही है, बल्कि कटड़ा से कश्मीर घूमने जाने वाले पर्यटकों के लिए भी वरदान साबित हुई है।

विस्टाडोम कोच का बढ़ा आकर्षण

आधुनिक सुविधाओं से लैस विस्टाडोम कोच यात्रियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

  • अब तक 400 से अधिक यात्रियों ने पारदर्शी छतों वाले इन कोचों के जरिए पीर पंजाल की खूबसूरत वादियों का आनंद लेते हुए यात्रा की है।

  • स्थानीय स्टेशनों जैसे खारी, सुबंर, संगलदान, सावलकोट और रियासी से भी 2,000 से अधिक यात्रियों ने इस सेवा का लाभ उठाया है।

क्षेत्रीय विकास में सहायक

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (SR. DCM) उचित सिंघल ने इस सफल संचालन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा:

“बनिहाल से कटड़ा तक सेवा का विस्तार करने का मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों के आवागमन को सुगम बनाना था। यह ट्रेन अब एक भरोसेमंद और किफायती विकल्प के रूप में उभरी है। भविष्य में भी यात्रियों की जरूरतों को देखते हुए रेलवे ऐसे प्रयास जारी रखेगा।”


प्रमुख स्टेशनों को मिला लाभ

इस ट्रेन सेवा से मार्ग में आने वाले कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है:

  1. रियासी और बक्कल: दुर्गम क्षेत्रों के लिए परिवहन अब पहले से आसान।

  2. संगलदान और सुबंर: स्थानीय व्यापार और दैनिक यात्रियों को बड़ी राहत।

  3. कटड़ा: तीर्थाटन पर्यटन में वृद्धि की संभावना।

देश/राष्ट्रीय समाचार: matribhumisamachar.com/category/national

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।