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श्रीनगर-बारामूला नेशनल हाईवे पर टला बड़ा हादसा: सुरक्षाबलों ने IED बरामद कर किया डिफ्यूज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जम्मू. जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों की सतर्कता से आज एक भीषण हादसा होने से टल गया। घाटी के महत्वपूर्ण श्रीनगर-बारामूला राष्ट्रीय राजमार्ग पर आतंकियों द्वारा प्लांट किए गए एक शक्तिशाली आईईडी (IED) को बरामद कर उसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया गया है।

गश्त के दौरान मिली संदिग्ध वस्तु

मिली जानकारी के अनुसार, आज सुबह जब सुरक्षाबलों की एक टुकड़ी नियमित गश्त पर थी, तभी उन्हें सड़क के किनारे एक संदिग्ध पैकेट दिखाई दिया। जवानों ने बिना जोखिम उठाए तुरंत प्रोटोकॉल का पालन किया और उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी। खतरे की गंभीरता को देखते हुए हाईवे पर यातायात को तत्काल रोक दिया गया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

बम निरोधक दस्ते की त्वरित कार्रवाई

सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) मौके पर पहुँचा। तकनीकी जांच के बाद पुष्टि हुई कि संदिग्ध वस्तु एक आईईडी थी, जिसे किसी बड़े धमाके के इरादे से वहां रखा गया था। विशेषज्ञों ने बेहद सावधानी बरतते हुए आईईडी को एक नियंत्रित विस्फोट के जरिए निष्क्रिय कर दिया।

“हमारी सतर्कता टीम ने समय रहते खतरे को पहचान लिया। यदि समय पर कार्रवाई न होती, तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था।”

सुरक्षा बल के एक वरिष्ठ अधिकारी का बयान

इलाके में ‘हाई अलर्ट’, सर्च ऑपरेशन जारी

इस घटना के बाद पूरे जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सुरक्षा बलों ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • सर्च ऑपरेशन: आसपास के गांवों और रिहायशी इलाकों की घेराबंदी कर तलाशी ली जा रही है।

  • तकनीकी निगरानी: संदिग्धों की पहचान के लिए ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जा रहा है।

  • डॉग स्क्वायड: विस्फोटक की गंध का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है।

रणनीतिक महत्व

श्रीनगर-बारामूला राजमार्ग न केवल नागरिक यातायात के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सेना के काफिलों की आवाजाही के लिए भी एक प्रमुख मार्ग है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह किसी बड़ी आतंकी साजिश का हिस्सा था, जिसे सुरक्षाबलों की मुस्तैदी ने समय रहते विफल कर दिया।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।