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एक वृक्ष सौ पुत्र समान: तेरईफाटक के श्रीराम जानकी मन्दिर में धूमधाम से हुआ वृक्षारोपण, RSS के अजय कुमार ने दिया बड़ा संदेश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

तेरईफाटक । गुरुवार, 18 जून 2026

पर्यावरण संरक्षण और धरती को हरा-भरा बनाने के संकल्प के साथ तेरईफाटक में एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वीणा वादिनी शाखा एवं महाकाल प्रभात फेरी तेरईफाटक के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना था।

श्रीराम जानकी मन्दिर प्रांगण में रोपे गए पौधे

यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम स्थानीय श्रीराम जानकी मन्दिर तेरईफाटक के पवित्र प्रांगण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मन्दिर परिसर में विभिन्न प्रकार के छायादार और औषधीय पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और स्थानीय सामाजिक संगठनों से जुड़े कई गणमान्य लोग और स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

“ऑक्सीजन की आवश्यकता हर व्यक्ति को है” – अजय कुमार

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के पर्यावरण गतिविधि संयोजक अजय कुमार ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने वृक्षों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:

“वृक्ष हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी हैं। ‘एक वृक्ष सौ पुत्र समान’ की भावना को आत्मसात करते हुए सभी स्वयंसेवकों को अधिक से अधिक पौधे लगाने चाहिए। इसके साथ ही हमें समाज के सभी लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए, क्योंकि ऑक्सीजन की आवश्यकता समाज के प्रत्येक व्यक्ति को है।”

“वृक्ष धरा के आभूषण हैं” – मनोज टाटा

इस मौके पर विभाग प्रचार प्रमुख मनोज टाटा ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने पर्यावरण की सुंदरता और उसकी सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि वृक्ष इस धरती के सच्चे आभूषण हैं। इन्हें लगाना, सजाना और इनकी देखभाल कर इन्हें संवारना हम सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

स्वयंसेवकों की रही गरिमामयी उपस्थिति

तेरईफाटक में आयोजित इस पर्यावरण उत्सव को सफल बनाने में स्थानीय जागरूक नागरिकों और स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से छोटेलाल प्रजापति, पंकज भारद्वाज, देशराज कुशवाहा, बाबूलाल शिवहरे और राजेन्द्र कुमार सहित बड़ी संख्या में अन्य स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सभी ने रोपे गए पौधों की सुरक्षा और उनके बड़े होने तक देखभाल करने का संकल्प लिया।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।