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उ.प्र. में आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की तत्परता जांचने के लिए 18 सितंबर को राज्यव्यापी मेगा मॉक ड्रिल का सफल आयोजन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read
लखनऊ । 
उत्तर प्रदेश में आपदा प्रबंधन और आपातकालीन राहत तंत्र की त्वरित प्रतिक्रिया और अंतर्विभागीय तालमेल को परखने के लिए 18 सितंबर को एक विस्तृत राज्यव्यापी मेगा मॉक एक्सरसाइज का आयोजन किया गया। राज्य सरकार के दिशानिर्देशों पर संचालित इस व्यापक पूर्व-नियोजित अभ्यास में प्रदेश के 34 जिलों की 157 तहसीलों को एक साथ शामिल किया गया।
इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपात स्थिति के दौरान Golden Hour (शुरुआती संवेदनशील समय) में पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य विभाग और एसडीआरएफ (SDRF) जैसी महत्वपूर्ण एजेंसियों के प्रतिक्रिया समय (Response Time) और आपसी समन्वय की समीक्षा करना था।

मुख्य आपदा परिदृश्य और सिमुलेशन (Simulated Scenarios)

अभ्यास के दौरान जमीनी स्तर पर वास्तविक संकट जैसी स्थितियां निर्मित की गईं, जिनसे निपटने के लिए विभिन्न विभागों ने मिलकर काम किया:
  1. भूकंप एवं ट्रेन हादसा: तेज भूकंप के झटकों के कारण इमारतों को नुकसान पहुंचने तथा ट्रेन के पटरी से उतरने का संयुक्त सिमुलेशन कर राहत और बचाव कार्य का परीक्षण किया गया।
  2. औद्योगिक गैस रिसाव: औद्योगिक क्षेत्रों में विषैली या ज्वलनशील रासायनिक गैस लीक होने पर आपात स्थिति में त्वरित नियंत्रण और सुरक्षित निकासी की रणनीति को परखा गया।
  3. बहुमंजिला अग्निकांड: ऊंची इमारतों में अचानक लगी आग को नियंत्रित करने और फंसे हुए नागरिकों के रेस्क्यू का लाइव अभ्यास हुआ।
  4. मलबे से बचाव व तत्काल प्राथमिक चिकित्सा: ध्वस्त ढांचों के मलबे से लोगों की त्वरित खोज, जीवन रक्षक निकासी तथा ट्रायेज (Triage) प्रणाली के आधार पर गंभीर मरीजों को प्राथमिकता देने का प्रदर्शन किया गया।

तकनीक का उपयोग और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन

आपदा प्रतिक्रिया को सुचारू बनाने के लिए राज्य और जिला दोनों स्तरों पर संचार तंत्र को सक्रिय रखा गया:
कार्यक्षेत्र / इकाईअभ्यास में निभाई गई मुख्य भूमिका
स्कूल एवं अस्पतालआपातकालीन सुरक्षित निकासी (Evacuation) योजनाओं का पुनरीक्षण और चिकित्सा नेटवर्क की तत्परता का परीक्षण।
औद्योगिक क्षेत्रकेमिकल लीकेज और अग्नि सुरक्षा प्रोटोकॉल (Fire Safety Protocols) की प्रभावकारिता की समीक्षा।
राज्य नियंत्रण कक्षवीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तकनीक के माध्यम से 157 तहसीलों की लाइव मॉनिटरिंग व कमांड सेंटर समन्वय।
जिला स्तर पर जिला आपातकालीन संचालन केंद्र (DEOC) और इंसिडेंट रिस्पांस टीम (IRT) को घटना की सूचना मिलते ही त्वरित प्रभाव से सक्रिय किया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: यह मॉक एक्सरसाइज उत्तर प्रदेश के कितने क्षेत्रों में आयोजित की गई?
उत्तर: यह मॉक ड्रिल उत्तर प्रदेश के 34 प्रमुख जिलों की 157 तहसीलों में एक साथ व्यापक स्तर पर आयोजित की गई।
प्रश्न 2: क्या इस अभ्यास में ट्रेन दुर्घटना जैसी स्थितियों को भी शामिल किया गया?
उत्तर: हाँ, भूकंप के प्रभाव से ट्रेन के बेपटरी होने का विशेष परिदृश्य निर्मित करके आपदा टीमों की बचाव क्षमता को परखा गया।
प्रश्न 3: इस मेगा मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: इसका प्राथमिक उद्देश्य आपात स्थिति के शुरुआती संवेदनशील समय (Golden Hour) में विभिन्न सरकारी विभागों और राहत बलों के बीच सूचना प्रवाह और रिस्पॉन्स टाइम की सटीकता की जांच करना था।
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह लेख उत्तर प्रदेश में आयोजित राज्यव्यापी आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल की जानकारी देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह एक पूर्व-नियोजित सिमुलेशन अभ्यास था, न कि कोई वास्तविक आपदा।
संबंधित लिंक (Useful Link):
उत्तर प्रदेश राज्य के मुख्य समाचारों और प्रासंगिक अपडेट्स के विस्तृत विवरण के लिए देखें: Matribhumi Samachar

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।