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सिंगूर की धरती से पीएम मोदी का मिशन 2026: ‘बंगाल अब बदलाव के लिए तैयार है’

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों की आहट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सिंगूर की उसी ऐतिहासिक भूमि से हुंकार भरी, जिसने कभी बंगाल की राजनीति की दिशा बदली थी। पीएम मोदी ने सिंगूर में 830 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण किया और राज्य की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला।

1. विकास बनाम ‘सिंडिकेट टैक्स’

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विकास को कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि बंगाल में निवेश तभी आएगा जब ‘सिंडिकेट राज’ खत्म होगा।

  • बड़ा आरोप: पीएम ने कहा, “बंगाल में हर विकास कार्य पर ‘सिंडिकेट टैक्स’ लगता है। जब तक माफिया और गुंडों का राज रहेगा, कोई निवेशक यहाँ आने की हिम्मत नहीं करेगा।”

  • मोदी की गारंटी: उन्होंने वादा किया कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो सिंगूर सहित पूरे बंगाल में उद्योगों की वापसी होगी और युवाओं को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

2. 2026 की चुनावी बिसात: ‘आसोल पोरिबोर्तन’ का नारा

पीएम मोदी ने इस रैली के जरिए 2026 के चुनावों का एजेंडा सेट कर दिया है:

  • जंगलराज बनाम सुशासन: उन्होंने टीएमसी के 15 साल के शासन को ‘महा जंगलराज’ करार देते हुए बिहार का उदाहरण दिया और कहा कि जैसे वहां शांति लौटी, वैसे ही बंगाल को भी ‘डबल इंजन’ सरकार की जरूरत है।

  • राष्ट्रीय सुरक्षा और घुसपैठ: पीएम ने आरोप लगाया कि टीएमसी वोट बैंक के लिए घुसपैठियों को संरक्षण दे रही है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है।

3. सिंगूर का प्रतीकात्मक महत्व

सिंगूर में रैली करना भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति है। यहाँ से टाटा के जाने को भाजपा ‘बंगाल के औद्योगिक पतन’ के रूप में पेश कर रही है। पीएम मोदी ने संदेश दिया कि जिस भूमि से उद्योगों को खदेड़ा गया था, वहीं से बंगाल के नए औद्योगिक युग की शुरुआत होगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।