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पुष्पा अपने सबसे बड़े डर का सामना करती है जब पन्नू एक भयानक हादसे का शिकार हो जाता है, सोनी सब के ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, फरवरी 2025: सोनी सब का शो पुष्पा इम्पॉसिबल अब एक बेहद भावुक और रोमांचक मोड़ पर पहुँच गया है। पुष्पा की ज़िंदगी एक बार फिर ऐसे हादसे से हिल जाती है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। हमेशा मुश्किलों के सामने मज़बूती से खड़ी रहने वाली पुष्पा (करुणा पांडे) इस बार ऐसे इम्तिहान से गुज़र रही है, जहाँ उसकी ताकत ही नहीं बल्कि उसकी इंसानियत भी परखी जाएगी। किस्मत उसे और पन्नू (पूजा खतरड़े) को ऐसे हालात में ले आती है, जहाँ से वापसी नामुमकिन लगती है।

महाशिवरात्रि की रात श्रद्धा और भक्ति से शुरू होती है, लेकिन अचानक ज़िंदगी करवट बदल लेती है। टिटली (भूमि रामोला) को गंभीर दिल की बीमारी का पता चलता है और उसे तुरंत हार्ट ट्रांसप्लांट की ज़रूरत होती है। परिवार टिटली को सच्चाई से दूर रखते हुए उसे हिम्मत देता है और चिराग (नितिन बाबू) को उसके कैरम सफर पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करता है ताकि टिटली का मनोबल बना रहे। इसी बीच, कदंबरी (बृंदा त्रिवेदी) का जेल से भागना सबके दिलों में डर पैदा कर देता है, क्योंकि उसका खतरा अब पुष्पा पर पहले से कहीं ज़्यादा मंडरा रहा है। और इसी तनाव के बीच अचानक पन्नू (पूजा खतरड़े) का भयानक हादसा हो जाता है, जिससे पुष्पा की दुनिया पूरी तरह हिल जाती है।

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क्या पुष्पा समय रहते पन्नू को बचा पाएगी… या फिर तक़दीर ने उसके लिए कुछ और ही लिखा है?

करुणा पांडे, जो पुष्पा का किरदार निभा रही हैं, कहती हैं, “एक्टर होने के नाते हम ड्रामेटिक सीन के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन जब ऐसे सीन आते हैं तो दिल को अलग ही तरह से छूते हैं। जब मैंने पन्नू के हादसे वाला सीन पढ़ा, तो मेरी पहली प्रतिक्रिया पुष्पा के तौर पर नहीं बल्कि एक माँ के तौर पर थी। अपने बच्चे को खतरे में देखना और यह न जानना कि आप उसे बचा पाएंगे या नहीं—यह बेहद डरावना अहसास है। उस बेबसी, उस डर और फिर भी माँ के भीतर उठने वाली ताकत को मैंने पकड़ने की कोशिश की। पुष्पा पहले ही टिटली की नाज़ुक हालत और परिवार पर मंडराते ख़तरे से जूझ रही है। और फिर अचानक पन्नू का हादसा उसकी दुनिया को पूरी तरह हिला देता है। हम कलाकार अक्सर अपने निजी डर और परिवार के प्रति प्यार से प्रेरणा लेते हैं, और शायद यही इन दृश्यों को इतना असरदार बनाता है।”

देखिए पुष्पा इम्पॉसिबल, हर सोमवार से शनिवार रात 9:30 बजे, सिर्फ़ सोनी सब पर।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।