नई दिल्ली । अपडेटेड : शुक्रवार, 10 जुलाई 2026
सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व आत्मिक शुद्धि, शक्ति की उपासना और मानसिक शांति का एक पावन अवसर होता है। जहाँ चैत्र और शारदीय नवरात्रि को सामाजिक व प्रकट रूप से मनाया जाता है, वहीं ‘गुप्त नवरात्रि’ तंत्र-मंत्र, साधना और गुप्त रूप से माता दुर्गा के नौ स्वरूपों व दस महाविद्याओं को प्रसन्न करने के लिए जानी जाती है।
वर्ष 2026 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व है। इस लेख में हम आपको वर्ष 2026 की आषाढ़ गुप्त नवरात्रि से जुड़ी हर छोटी-बड़ी प्रामाणिक जानकारी, घटस्थापना का मुहूर्त और साधना के नियमों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 कब से शुरू है? (Tithi & Dates)
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ होता है। इस वर्ष 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि जून के मध्य से शुरू होकर जून के आखिरी सप्ताह तक चलेगी। प्रतिपदा तिथि के दिन ही पवित्र घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है।
साधकों के लिए यह समय नौ दिनों तक बिना किसी बाहरी आडंबर के, एकांत में माता भगवती की आराधना करने का होता है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त (Ghatasthapana Shubh Muhurat)
गुप्त नवरात्रि की पूजा में समय और मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। गलत समय पर की गई घटस्थापना से साधना का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
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प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: जून 2026 (सटीक तिथियां स्थानीय चंद्रोदय और पंचांग भेद के अनुसार निर्धारित होती हैं)।
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घटस्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह के समय सूर्योदय के बाद का काल कलश स्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसके अतिरिक्त दोपहर में अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापित किया जा सकता है।
गुप्त नवरात्रि की दस महाविद्याएं (10 Mahavidyas)
सामान्य नवरात्रि में जहाँ माता दुर्गा के नौ रूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी आदि) की पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक और सनातनी साधक माता की दस सर्वोच्च शक्तियों यानी दस महाविद्याओं की गुप्त साधना करते हैं:
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माता काली
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माता तारा
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माता त्रिपुर सुंदरी (षोडशी)
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माता भुवनेश्वरी
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माता छिन्नमस्ता
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माता त्रिपुर भैरवी
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माता धूमावती
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माता बगलामुखी
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माता मातंगी
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माता कमला
पूजा विधि और कड़े नियम (Puja Vidhi & Rituals)
चूंकि यह गुप्त नवरात्रि है, इसलिए इसकी सबसे पहली शर्त है—गोपनीयता। आप जो भी मंत्र जाप या साधना कर रहे हैं, उसकी जानकारी आपके अलावा किसी तीसरे व्यक्ति को नहीं होनी चाहिए।
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शुद्धि और संकल्प: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो लाल या पीले) धारण करें।
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कलश स्थापना: लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या यंत्र स्थापित करें। मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और कलश में गंगाजल, सिक्का, अक्षत और दूर्वा डालकर स्थापित करें।
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अखंड ज्योति व मंत्र जाप: यदि संभव हो तो नौ दिनों के लिए अखंड दीपक प्रज्वलित करें। मां दुर्गा के ‘नवाण मंत्र’ या किसी विशिष्ट महाविद्या के मंत्र का लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से जाप करें।
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सात्विकता: इन नौ दिनों में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें और तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।
Frequent Asked Questions (FAQs) – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: गुप्त नवरात्रि और सामान्य नवरात्रि में क्या अंतर है?
उत्तर: सामान्य नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) सांसारिक सुख, पारिवारिक समृद्धि और प्रकट रूप से उत्सव मनाकर की जाती है। जबकि गुप्त नवरात्रि (आषाढ़ और माघ) मुख्य रूप से तंत्र साधना, मनोकामना पूर्ति और गुप्त रूप से कठिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए की जाती है।
प्रश्न 2: क्या गृहस्थ लोग भी गुप्त नवरात्रि का व्रत रख सकते हैं?
उत्तर: हाँ, गृहस्थ जन भी गुप्त नवरात्रि का व्रत और पूजा कर सकते हैं। हालांकि, गृहस्थों को तांत्रिक साधना के बजाय सात्विक रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ या सामान्य मंत्रों का जाप करना चाहिए।
प्रश्न 3: गुप्त नवरात्रि में किस रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है?
उत्तर: माता लक्ष्मी और शक्ति की पूजा में लाल, पीले या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। साधना के दौरान काले या नीले रंग के वस्त्रों से बचना चाहिए।
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह लेख सामान्य धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय गणनाओं और लोक कथाओं पर आधारित है। किसी भी प्रकार की विशेष तांत्रिक साधना या कड़े उपवास की शुरुआत करने से पहले अपने कुलगुरु या योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें। मातृभूमि समाचार इसकी प्रामाणिकता की पूरी जिम्मेदारी नहीं लेता।
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