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ओबीसी के लिए 27% आरक्षण कोई कृपा नहीं, हमारा संवैधानिक हक़ व अधिकार: राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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भोपाल, जनवरी 2026: राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में रविवार को ओबीसी-एससी-एसटी संयुक्त मोर्चा द्वारा आयोजित आम सभा में राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम ने भी शिरकत की और प्रदेश सरकार से ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण को शीघ्र बहाल करने की स्पष्ट मांग की। इस आम सभा में प्रदेशभर से 70 से अधिक सामाजिक संगठनों की भागीदारी देखने को मिली।

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा कि ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों को वर्षों से अधर में रखा गया है, जो सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर रिक्तियों में 27 प्रतिशत आरक्षण दिखाती है, वहीं दूसरी ओर 13 प्रतिशत पदों को होल्ड कर देना ओबीसी समाज के साथ अन्याय है।

डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा कि, “27 प्रतिशत आरक्षण कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकार है। हम किसी का हक़ नहीं मार रहे बल्कि अपने हक़ की मांग कर रहे हैं। जब तक ओबीसी को उसका पूरा हक़ नहीं मिलेगा, तब तक सामाजिक समानता की बात अधूरी रहेगी।” उन्होंने एससी-एसटी-ओबीसी को जनसंख्या के अनुपात में निजी क्षेत्रों में आरक्षण दिए जाने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में भी ओबीसी को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।

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गौरतलब है कि डॉ. अतुल मलिकराम वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल (एस) की मध्य प्रदेश इकाई के साथ सक्रिय भूमिका में हैं और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आर. बी. सिंह पटेल के साथ मिलकर संगठन निर्माण तथा आगामी चुनावों की रणनीतिक तैयारी में जुटे हुए हैं। सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता को प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।