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सृष्टि सिंह ने साझा किया कि असली डॉक्टरों को देखकर उन्होंने सोनी सब के आने वाले शो ‘यादें’ में अपने किरदार को बेहतर समझा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, फरवरी 2026: सोनी सब अपने नए शो यादें पेश करने जा रहा है। यह शो इंटरनेशनल स्तर पर सराहे गए इटैलियन सीरीज़ DOC का भारतीय रूपांतरण है, जिसे दुनिया के पाँच से अधिक देशों में सफलतापूर्वक अपनाया जा चुका है। यादें दर्शकों को एक इमोशनली ग्राउंडेड नैरेटिव देगा, जिसमें इंसानी रिश्तों की गहराई, ज़िंदगी बदल देने वाले पल और दूसरी मौक़े की कहानी को बेहद दिल से और यथार्थवादी अंदाज़ में दिखाया जाएगा। शो यह भी दिखाएगा कि कैसे कभी-कभी एक घटना सब कुछ बदल देती है।

रेज़िडेंट डॉक्टर वाणी का किरदार निभा रही हैं सृष्टि सिंह, जिन्होंने अपने रोल को बेहद गहराई और समझ के साथ अपनाया है। वाणी सिर्फ़ एक युवा डॉक्टर नहीं है जो मेडिकल माहौल में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है, बल्कि वह डॉक्टर देव (इक़बाल खान द्वारा निभाया गया किरदार) को अपना आदर्श मानती है और चुपचाप उनकी खूबियों को अपनाने की चाह रखती है। इस जटिल डायनामिक को समझने के लिए सृष्टि ने सिर्फ़ मेडिकल टर्मिनोलॉजी तक खुद को सीमित नहीं किया, बल्कि असली डॉक्टरों को अस्पतालों में काम करते हुए देखा और महसूस किया। उन्होंने बारीकी से नोट किया कि दबाव की स्थिति में डॉक्टर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और कैसे शांत रहकर अधिकार बनाए रखते हैं।

अपनी तैयारी और किरदार के बारे में सृष्टि सिंह ने कहा, “एक समय था जब मैं सच में डॉक्टर बनने का सपना देखती थी, और इस माहौल में दोबारा कदम रखने से वे पुराने सपने फिर से ताज़ा हो गए। किरदार की तैयारी के दौरान खासकर रेज़िडेंट डॉक्टरों को देखना मेरे लिए आंखें खोल देने वाला अनुभव था। वे लगातार दबाव, ज़िम्मेदारी और लंबे घंटों के बीच काम करते हैं, लेकिन कभी नाटकीय प्रतिक्रिया नहीं देते। वे पूरी तन्मयता से सुनते हैं, हर डिटेल को प्रोसेस करते हैं और फिर कुछ साफ़, नपे-तुले शब्दों में समस्या को बताते हैं। इस समझ ने वाणी के किरदार को निभाने में मेरी मदद की। इससे मुझे उसकी शांत ताक़त और संयम को अपनाने का मौका मिला, और कई मायनों में ऐसा लगा जैसे मैं उस डॉक्टर से फिर जुड़ रही हूं, जिसे बनने का मैंने कभी सपना देखा था।”

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देखिए हुई गुम्म यादें – एक डॉक्टर, दो ज़िंदगियां, जल्द ही सोनी सब पर।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।