रांची. झारखंड के गुमला जिले में शुक्रवार को उस वक्त भारी तनाव फैल गया जब ‘चंगाई सभा’ के प्रचार को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध जताया। सिसई थाना क्षेत्र के कुम्हार मोड़ (छरदा रोड) इलाके में घर-घर जाकर पैम्फलेट बांट रही पांच महिलाओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इन पर प्रलोभन देकर धर्मांतरण करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का गंभीर आरोप लगा है।
📱 घर-घर जाकर बांटे जा रहे थे ‘चंगाई’ के पैम्फलेट
जानकारी के अनुसार, पुग्गू और आसपास के इलाकों की रहने वाली पांच महिलाएं—रौमिला मिंज, किरण कुजूर, शकीरा तिर्की, सुशीला देवी और इंदु देवी—सिसई के रिहायशी इलाकों में घूम-घूमकर चंगाई सभा का प्रचार कर रही थीं। पैम्फलेट्स में दावा किया गया था कि सभा में शामिल होने से गंभीर बीमारियां ठीक हो जाती हैं और जीवन में खुशहाली आती है।
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⚖️ विवाद की मुख्य वजह: ‘आपत्तिजनक टिप्पणी’ का आरोप
मामला तब बिगड़ा जब स्थानीय निवासी आनंद साहू ने आरोप लगाया कि ये महिलाएं उनके घर आईं और देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। साहू के मुताबिक, महिलाओं ने उन्हें अपनी परंपराएं छोड़ने और चंगाई सभा से जुड़ने के लिए दबाव बनाया।
घटनाक्रम की मुख्य बातें:
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विरोध प्रदर्शन: खबर फैलते ही विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर जमा हो गए।
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पुलिस की एंट्री: भीड़ के गुस्से को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और पांचों महिलाओं को सुरक्षित थाने पहुंचाया।
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लिखित शिकायत: हिंदू संगठनों ने थाने में लिखित आवेदन देकर महिलाओं पर प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण के प्रयास का आरोप लगाया है।
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🔍 समझें: क्या है ‘चंगाई सभा’ और क्यों होता है विवाद?
‘चंगाई सभा’ (Healing Meetings) मुख्य रूप से ईसाई धर्म के कुछ समूहों द्वारा आयोजित की जाती है, जहाँ प्रार्थना के माध्यम से असाध्य रोगों को ठीक करने का दावा किया जाता है। अक्सर इन सभाओं पर पिछड़े और आदिवासी समुदायों को ‘चमत्कार’ का लालच देकर धर्मांतरण कराने के आरोप लगते रहे हैं।
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📜 झारखंड में क्या कहता है धर्मांतरण विरोधी कानून?
झारखंड में ‘धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2017’ (Jharkhand Freedom of Religion Act, 2017) लागू है। इस कानून के तहत:
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जबरन धर्मांतरण पर रोक: बल प्रयोग, प्रलोभन (कैश, उपहार या अन्य लाभ) या धोखाधड़ी से किसी का धर्म परिवर्तन कराना दंडनीय अपराध है।
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कड़ी सजा का प्रावधान: दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल और 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
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विशेष सुरक्षा: यदि धर्मांतरण किसी नाबालिग, महिला या SC/ST समुदाय के व्यक्ति का कराया जाता है, तो सजा 4 साल की जेल और 1 लाख रुपये जुर्माने तक बढ़ सकती है।
📢 प्रशासन की अपील
सिसई पुलिस फिलहाल महिलाओं से पूछताछ कर रही है और पैम्फलेट्स के स्रोत की जांच की जा रही है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
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