लोड हो रहा है...

एलन मस्क को बड़ा झटका: ट्विटर डील विवाद में ज्यूरी ने दोषी माना, देना होगा $2.6 अरब डॉलर का हर्जाना

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

वाशिंगटन. दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार एलन मस्क (Elon Musk) एक बार फिर बड़ी कानूनी मुसीबत में हैं। 2022 में ट्विटर (अब X) के अधिग्रहण के दौरान उनके द्वारा किए गए “विवादास्पद ट्वीट्स” अब उनकी जेब पर भारी पड़ने वाले हैं। सैन फ्रांसिस्को की एक संघीय ज्यूरी ने शुक्रवार (20 मार्च, 2026) को फैसला सुनाते हुए मस्क को निवेशकों को गुमराह करने का दोषी पाया है।

? क्या है पूरा मामला?

यह कानूनी लड़ाई उस समय की है जब मस्क $44 बिलियन में ट्विटर को खरीदने की प्रक्रिया में थे। 13 मई, 2022 को मस्क ने एक ट्वीट कर कहा था कि यह डील “अस्थायी रूप से होल्ड” (Temporarily on hold) पर है। इस एक बयान ने बाजार में भूकंप ला दिया था।

  • आरोप: निवेशकों का कहना है कि मस्क ने जानबूझकर कंपनी की साख गिराई ताकि वे डील की कीमत कम करा सकें (Renegotiate) या सौदे से पीछे हट सकें।

  • ज्यूरी का फैसला: 9 सदस्यीय ज्यूरी ने माना कि मस्क के दो ट्वीट भ्रामक थे और इससे शेयरधारकों को भारी नुकसान हुआ। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें “धोखाधड़ी की बड़ी साजिश” (Scheme to defraud) के आरोपों से बरी कर दिया है।

? हर्जाने का गणित: कितना देना होगा मुआवजा?

अदालत ने नुकसान की भरपाई के लिए एक खास फॉर्मूला तय किया है। निवेशकों के वकीलों के अनुसार, कुल हर्जाना $2.6$ अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

श्रेणीअनुमानित हर्जाना
स्टॉक निवेशकलगभग 2.1 अरब डॉलर
ऑप्शंस होल्डर्सलगभग 500 मिलियन डॉलर
प्रति शेयर मुआवजा3 से 8 डॉलर (प्रति दिन के हिसाब से)

नोट: यह मुआवजा उन निवेशकों को मिलेगा जिन्होंने 13 मई से 3 अक्टूबर 2022 के बीच अनिश्चितता के कारण अपने शेयर बेचे थे।

?️ मस्क का बचाव और ‘Poop Emoji’ का जिक्र

मुकदमे के दौरान मस्क की कानूनी टीम ने तर्क दिया कि मस्क वास्तव में ‘बोट्स’ (नकली खातों) की संख्या को लेकर चिंतित थे। उन्होंने पूर्व सीईओ पराग अग्रवाल के स्पष्टीकरण पर ‘Poop Emoji’ ट्वीट करने जैसी घटनाओं को अपनी “निजी राय” बताया।

मस्क के वकीलों का कहना है:

  1. ट्विटर प्रबंधन ने फेक अकाउंट्स का डेटा छिपाया था।

  2. मस्क ने अंततः उसी कीमत ($54.20 प्रति शेयर) पर डील पूरी की, जिससे शेयरधारकों को कोई स्थायी नुकसान नहीं हुआ।

⚖️ एक्सपर्ट्स की राय: “कानून से ऊपर कोई नहीं”

वादी पक्ष के वकील मार्क मोलम्फी ने जीत के बाद कहा, “यह फैसला एक कड़ा संदेश है कि चाहे आप कितने भी अमीर या शक्तिशाली क्यों न हों, आपको कानून का पालन करना होगा।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस भविष्य में सोशल मीडिया पर दिए जाने वाले कॉर्पोरेट बयानों के लिए एक ‘नजीर’ बनेगा।

⏭️ अगला कदम क्या होगा?

मस्क की टीम ने इस फैसले को “रास्ते का एक रोड़ा” बताया है और वे इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं। मस्क का तर्क है कि उनके ट्वीट केवल पारदर्शिता के लिए थे, न कि बाजार को प्रभावित करने के लिए।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।