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भारत ने दुनिया को दिखाया दम! पश्चिम एशिया संकट के बीच कोयला उत्पादन में रचा इतिहास

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. भारत ने वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच अपनी आर्थिक संप्रभुता का लोहा मनवाया है। कोयला मंत्रालय ने आधिकारिक घोषणा की है कि देश ने 20 मार्च 2026 को लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन (1 Billion Tonne) कोयला उत्पादन का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘अमृत काल’ की एक गौरवशाली उपलब्धि बताते हुए देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए एक मजबूत नींव करार दिया है।

? वैश्विक संकट के बीच ‘सुरक्षा कवच’ बना घरेलू कोयला

वर्तमान में जब पश्चिम एशिया के हालातों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता है, भारत का यह रिकॉर्ड उत्पादन एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है।

  • रिकॉर्ड स्टॉक: देश के थर्मल पावर प्लांट्स के पास वर्तमान में 53.41 मिलियन टन कोयला सुरक्षित है।

  • निर्बाध बिजली: यह स्टॉक अगले 23 दिनों तक बिना किसी रुकावट के देश को रोशन रखने के लिए पर्याप्त है।

  • आयात पर लगाम: घरेलू उत्पादन बढ़ने से महंगे विदेशी कोयले पर निर्भरता कम हुई है, जिससे राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिली है।

? इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में कोयले की ‘गर्जना’

फरवरी 2026 के नवीनतम सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश की औद्योगिक गतिविधियों में कोयला क्षेत्र एक ‘ग्रोथ इंजन’ बना हुआ है:

मुख्य क्षेत्र (Core Sector)वृद्धि (फरवरी 2026)
संयुक्त इंफ्रास्ट्रक्चर इंडेक्स2.3%
कोयला उत्पादन2.3%
बिजली उत्पादन0.5%
स्टील उत्पादन7.2%

नोट: स्टील और सीमेंट सेक्टर में आई तेजी के पीछे भी कोयले की निर्बाध आपूर्ति एक बड़ा कारक रही है।

? सफलता के पीछे की रणनीति: कोल इंडिया और ‘स्मार्ट माइनिंग’

कोयला मंत्रालय ने इस सफलता का श्रेय Coal India Limited (CIL) और निजी खदानों के बीच बेहतर तालमेल को दिया है।

  1. डिजिटल निगरानी: खदानों से लेकर पावर प्लांट तक सप्लाई चेन की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग।

  2. कैप्टिव खदानें: कैप्टिव और वाणिज्यिक (Commercial) खदानों ने इस बार 200 मिलियन टन से अधिक का योगदान दिया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10% से अधिक की वृद्धि है।

  3. लॉजिस्टिक्स में सुधार: रेलवे और जलमार्गों का प्रभावी उपयोग कर ‘फर्स्ट-माइल कनेक्टिविटी’ को मजबूत किया गया है।

? निष्कर्ष: ‘विकसित भारत 2047’ का मार्ग प्रशस्त

1 अरब टन का यह आंकड़ा महज एक संख्या नहीं है, बल्कि यह Viksit Bharat 2047 के विजन की ओर बढ़ता एक ठोस कदम है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है, बल्कि किसी भी वैश्विक अनिश्चितता का सामना करने के लिए रणनीतिक रूप से तैयार है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।