नई दिल्ली | शुक्रवार, 21 अगस्त 2026
देशभर के स्कूलों में बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई हुई। डिजिटल दौर में बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और खेल के मैदानों से उनकी दूर होती जीवनशैली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
याचिका का मुख्य उद्देश्य देश के शिक्षा ढांचे में खेल और शारीरिक गतिविधियों को प्राथमिकता देना है, ताकि पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक साक्षरता (Physical Literacy) भी बच्चों के दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन सके।
क्या हैं जनहित याचिका (PIL) की मुख्य मांगें?
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अनुच्छेद 21A और मौलिक अधिकार: याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि खेल और Physical Literacy को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा घोषित किया जाए।
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पाठ्यक्रम में अनिवार्यता: देश के सभी बोर्ड्स (CBSE, ICSE और राज्य बोर्ड) के पाठ्यक्रम में खेल शिक्षा और नियमित शारीरिक गतिविधियों को अनिवार्य विषय की तरह जोड़ा जाए।
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बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का विकास: केवल खेल अवधि तय करना ही नहीं, बल्कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में खेल के मैदान और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना इस याचिका का प्रमुख लक्ष्य है।
अमिकस क्यूरी का सुझाव: प्रतिदिन 90 मिनट का खेल समय
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट की सहायता कर रहे अमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) ने एक व्यावहारिक प्रस्ताव सामने रखा। उन्होंने सिफारिश की कि देश भर के सीबीएसई, आईसीएसई और राज्य बोर्डों के स्कूलों में प्रतिदिन कम से कम 90 मिनट का समय केवल खेल और शारीरिक गतिविधियों के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का वर्तमान रुख
हालिया सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने बच्चों के संपूर्ण विकास और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक स्कूल-कॉलेजों में खेलों को पूरी तरह से ‘अनिवार्य विषय’ घोषित करने का अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। मामला फिलहाल शिक्षा प्रणाली में खेलों को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक तरीके से लागू करने की मांगों से संबंधित है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. सुप्रीम कोर्ट में खेल शिक्षा से जुड़ी याचिका में मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: याचिका में खेल और Physical Literacy को अनुच्छेद 21A के तहत मौलिक अधिकार बनाने और इसे स्कूलों में अनिवार्य हिस्सा घोषित करने की मांग की गई है।
Q2. अमिकस क्यूरी ने स्कूलों के लिए कितना खेल समय निर्धारित करने का सुझाव दिया?
उत्तर: अमिकस क्यूरी ने सीबीएसई, आईसीएसई और सभी राज्य बोर्डों के स्कूलों में प्रतिदिन कम से कम 90 मिनट का समय खेल के लिए तय करने का सुझाव दिया है।
Q3. क्या सुप्रीम कोर्ट ने खेलों को अनिवार्य विषय घोषित कर दिया है?
उत्तर: नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अभी इसे अनिवार्य विषय घोषित नहीं किया है; मामला खेल को शिक्षा प्रणाली में प्रभावी ढंग से शामिल करने पर विचाराधीन है।
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह लेख सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले से जुड़े कानूनी अपडेट्स और अंतिम फैसलों के लिए आधिकारिक कोर्ट ऑर्डर और भारत सरकार की गाइडलाइंस का अवलोकन करें।
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