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पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया: निपटाई गई अपीलों में 93% मतदाताओं के नाम बहाल, 37 लाख से अधिक मामले अभी भी लंबित

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
6 Min Read
कोलकाता । 
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़े बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गए हैं। अब तक फैसले तक पहुंची अपीलों में से लगभग 93 प्रतिशत मामलों में मतदाताओं के नाम पुनः मतदाता सूची में शामिल करने के आदेश दिए गए हैं।
हालांकि, यह उच्च बहाली दर केवल उन मामलों से जुड़ी है जिनका निपटारा हो चुका है। कुल दर्ज अपीलों के विशाल आंकड़े के सामने यह एक छोटा हिस्सा है।

1.26 लाख से अधिक अपीलों का फैसला: 93% को मिली राहत

निर्वाचन आयोग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक कुल 1,26,194 अपीलों पर अंतिम निर्णय लिया जा चुका है।
  • नाम बहाली के आदेश: निपटाई गई अपीलों में से 1,13,943 मामलों में चुनाव आयोग ने नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने का फैसला दिया।
  • सफलता दर: इस आधार पर निपटारे तक पहुंची अपीलों में लगभग 93% मामले नाम बहाली के पक्ष में रहे हैं।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रतिशत संपूर्ण SIR प्रक्रिया का अंतिम निष्कर्ष नहीं है, क्योंकि यह केवल निर्णित मामलों (Resolved Cases) की संख्या पर आधारित है।

38.31 लाख कुल अपीलें: 37.05 लाख मामले अभी भी लंबित

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची संशोधन से जुड़ी कुल 38.31 लाख अपीलें दाखिल की गई हैं।
  1. अपीलकर्ताओं की श्रेणी: इनमें से अधिकांश अपीलें उन मतदाताओं द्वारा दर्ज कराई गई हैं जिनके नाम किसी कारणवश मतदाता सूची से हटा दिए गए थे और वे अपना नाम वापस जुड़वाना चाहते हैं। इसके साथ ही, कुछ आपत्तियां सूची में मौजूद फर्जी या गलत प्रविष्टियों को चुनौती देने के लिए भी लगाई गई हैं।
  2. लंबित मामलों का दबाव: 16 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, करीब 37.05 लाख अपीलें सुनवाई और निर्णय के इंतजार में लंबित हैं।

 

लंबित अपीलों का निपटारा: 42 ट्रिब्यूनल के गठन का प्रस्ताव

इतनी बड़ी संख्या में पेंडिंग मामलों को देखते हुए इनके समयबद्ध निपटारे को लेकर प्रशासनिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। वर्तमान गति से सभी अपीलों की सुनवाई पूरा होने में लंबा समय लग सकता है।
  • अपीलीय व्यवस्था का विस्तार: मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए 42 अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए जाने का प्रस्ताव सामने आया है।
  • मौजूदा क्षमता: वर्तमान में केवल 19 ट्रिब्यूनल ही इन अपीलों की सुनवाई कर रहे हैं।

 

अतिरिक्त ट्रिब्यूनल गठित होने से अपीलीय तंत्र मजबूत होगा और लाखों मतदाताओं की आपत्तियों का समय पर समाधान हो सकेगा।

चुनाव परिणामों और जीत के अंतर पर प्रभाव: क्या है चुनाव आयोग का रुख?

SIR प्रक्रिया के तहत हटाए गए नामों और आगामी विधानसभा चुनाव के परिणामों पर इसके प्रभाव को लेकर राजनीतिक और कानूनी गलियारों में लगातार बहस जारी है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि:
  • केवल हटाए गए नामों की संख्या को किसी विधानसभा सीट के जीत या हार के अंतर से जोड़कर देखना तकनीकी और कानूनी रूप से गलत है।
  • समीक्षा प्रक्रिया के दौरान मृत (Deceased), स्थानांतरित (Shifted), अनुपस्थित (Absentee), और डुप्लीकेट (Duplicate) प्रविष्टियों को नियम के तहत हटाया जाता है।

 

प्रमुख आंकड़ों का संक्षिप्त विवरण

श्रेणी संख्या / विवरण
कुल दाखिल अपीलें 38.31 लाख
निपटाई गई अपीलें 1,26,194
नाम बहाली के आदेश 1,13,943
लंबित अपीलें ~37.05 लाख
मौजूदा अपीलीय ट्रिब्यूनल 19
प्रस्तावित ट्रिब्यूनल 42
बहाली दर (निपटाई गई अपीलों में) ~93%

सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया में 93% नाम बहाली का आंकड़ा अब तक सुलझाई गई 1,26,194 अपीलों का प्रतिनिधित्व करता है। जब तक शेष 37.05 लाख से अधिक लंबित अपीलों का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक मतदाता सूची में सुधार और इसके अंतिम राजनीतिक प्रभाव की पूरी तस्वीर साफ होना बाकी है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1: पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया में 93% नाम बहाली का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ यह है कि जिन 1.26 लाख से अधिक अपीलों पर अब तक निर्णय लिया गया है, उनमें से 93% मामलों में मतदाताओं के नाम सूची में वापस जोड़ने का आदेश दिया गया है। यह आंकड़ा सभी 38.31 लाख अपीलों का समग्र प्रतिशत नहीं है।
Q2: पश्चिम बंगाल में कितनी अपीलें लंबित हैं?
उत्तर: आयोग के अनुसार लगभग 37.05 लाख अपीलें अभी भी सुनवाई और निपटारे के लिए लंबित हैं।
Q3: अपीलों के त्वरित निपटारे के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
उत्तर: सुनवाई में तेजी लाने के लिए वर्तमान 19 ट्रिब्यूनल की संख्या बढ़ाकर 42 अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित करने का प्रस्ताव है।

Disclaimer

यह लेख चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की अद्यतन स्थिति पर आधारित एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट है। अंतिम आंकड़े और नियम चुनाव आयोग के आधिकारिक दिशा-निर्देशों एवं लंबित अपीलों के अंतिम निपटारे के अधीन हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।