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ब्रिटेन में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम: लॉन्च हुआ ‘एंटी हिंदू हेट मॉनिटरिंग सेंटर’, जानें क्यों पड़ी इसकी जरूरत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

लंदन । शुक्रवार, 22 मई 2026

यूनाइटेड किंगडम (UK) में रहने वाले हिंदू समुदाय की सुरक्षा, उनके अधिकारों की रक्षा और उनके खिलाफ होने वाले नफरती अपराधों पर रोक लगाने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की गई है। ब्रिटेन में पहली बार हिंदू समुदाय को निशाना बनाकर किए जाने वाले अपराधों की सटीक ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग के लिए एक समर्पित ऑनलाइन मंच की शुरुआत हुई है, जिसका नाम एंटी हिंदू हेट मॉनिटरिंग सेंटर (Anti-Hindu Hate Monitoring Center) रखा गया है।

इस प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश हिंदू समुदाय के खिलाफ होने वाले भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, तोड़फोड़, ऑनलाइन दुर्व्यवहार और शारीरिक हिंसा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी घटना को एक व्यवस्थित डेटाबेस में दर्ज करना है।

लंदन में धार्मिक हेट क्राइम में 23% का भारी इजाफा

हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और बीबीसी (BBC) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, लंदन में धर्म के आधार पर होने वाले नफरती अपराधों (Hate Crimes) में इस साल 23 प्रतिशत की चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

नीचे दिए गए आंकड़ों से स्पष्ट है कि स्थिति कितनी संवेदनशील हो चुकी है:

समयावधि (जनवरी से अप्रैल)दर्ज किए गए धार्मिक हेट क्राइम के मामले
पिछला वर्ष839 मामले
यह वर्ष (2026)1,032 मामले

यह बढ़ता ग्राफ न केवल स्थानीय हिंदू संगठनों बल्कि लंदन पुलिस (मेट्रोपॉलिटन पुलिस) के लिए भी बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

आखिर क्यों पड़ी इस विशेष प्लेटफॉर्म की जरूरत?

ब्रिटेन में इस नई पहल का समर्थन कर रहे प्रबुद्धजनों और संस्थाओं का कहना है कि अब तक हिंदू विरोधी घटनाओं को सही तरीके से संबोधित नहीं किया जा पा रहा था। इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण थे:

  • अंडर-रिपोर्टिंग और डर: बहुत से पीड़ित समाज में रहने वाले असामाजिक तत्वों के डर, कानूनी प्रक्रियाओं की पेचीदगियों या किसी अन्य संकोच के कारण पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज ही नहीं कराते थे।

  • मजबूत ट्रैकिंग सिस्टम का अभाव: ब्रिटेन के मौजूदा प्रशासनिक और पुलिसिंग सिस्टम में हिंदू विरोधी हेट क्राइम को अलग श्रेणी में रखकर उसके पैटर्न को समझने की कोई पुख्ता और व्यवस्थित व्यवस्था नहीं थी।

यह नई पहल पिछले साल जारी हुई एक व्यापक खोजी रिपोर्ट “ब्रिटेन में हिंदुओं के प्रति नफरत और भेदभाव की जांच” पर आधारित है। उस रिपोर्ट में साफ तौर पर रेखांकित किया गया था कि हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ते दुर्व्यवहार से निपटने के लिए एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म का होना अनिवार्य है।

क्या होगा इसका कार्य और अगला लक्ष्य?

यह केंद्र केवल शिकायतें दर्ज करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक डेटा-संचालित (Data-driven) थिंक टैंक की तरह काम करेगा। यह पूरे ब्रिटेन से आंकड़े जुटाकर नफरत फैलाने वाली ताकतों के काम करने के तरीके (पैटर्न) को समझेगा और समय-समय पर इसकी पब्लिक रिपोर्ट जारी करेगा।

लंदन असेंबली के प्रमुख सदस्य कृपेश हिरानी ने इस पहल का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने साझा किया कि उन्होंने कुछ साल पहले लंदन के ‘सिटी हॉल’ में भी इस गंभीर मुद्दे को उठाया था।

“यह बेहद संतोषजनक है कि अब हमारा समुदाय एकजुट होकर इस दिशा में काम कर रहा है। हमारा अगला और सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि इस प्लेटफॉर्म पर जो भी डेटा और शिकायतें दर्ज हों, उन्हें मेट्रोपॉलिटन पुलिस भी आधिकारिक तौर पर मान्यता दे।”

— कृपेश हिरानी, सदस्य, लंदन असेंबली

हिरानी ने ब्रिटेन के कोने-कोने में रहने वाले हिंदू परिवारों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के उत्पीड़न, ऑनलाइन ट्रोलिंग या भेदभाव का सामना करने पर इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आकर अपनी शिकायत व घटना को बिना किसी डर के जरूर दर्ज कराएं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।