वॉशिंगटन । बुधवार, 22 जुलाई 2026
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष बुधवार (22 जुलाई 2026) को अत्यंत गंभीर मोड़ पर पहुंच गया। अमेरिकी सेना ने लगातार 11वीं रात ईरान के कई रणनीतिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर भीषण हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि नवीनतम सैन्य अभियान का यह चरण पूरा कर लिया गया है, हालांकि क्षेत्र में उच्च सैन्य सतर्कता और गश्त पहले की तरह जारी रहेगी।
सैन्य अभियानों का दायरा और अमेरिकी प्रशासन का दावा
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस आक्रामक क्षमता को निष्प्रभावी करना है जिसका उपयोग क्षेत्रीय समुद्री व्यापार और अमेरिकी सैन्य हितों के खिलाफ किया जा सकता है।
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मुख्य ठिकाने: ड्रोन भंडारण केंद्र, सैन्य विमान हैंगर और मिसाइल डिपो।
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CENTCOM का रुख: CENTCOM ने स्पष्ट किया है कि भले ही यह चरण पूरा हो गया हो, लेकिन अमेरिकी बल क्षेत्र में किसी भी जवाबी कार्रवाई का तुरंत मुकाबला करने के लिए तैनात रहेंगे।
ईरान का तीखा पलटवार: “संप्रभुता पर हमला”
ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी अभियानों की कड़े शब्दों में निंदा की है।
ईरानी विदेश मंत्रालय का बयान:
“अमेरिका की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन है और हमारी संप्रभुता व नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला है। ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।”
लाल सागर में समुद्री संकट और तेल की कीमतों पर असर
इस युद्ध की आंच अब पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा मार्गों तक फैल चुकी है। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में बढ़ाई गई गतिविधियों के कारण जहाजों के लिए सुरक्षा जोखिम चरम पर पहुंच गया है।
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टैंकरों का रूट डायवर्जन: सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए सऊदी अरब से कच्चे तेल का परिवहन कर रहे कई बड़े एशिया-गामी टैंकरों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है।
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ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लाल सागर में तनाव इसी तरह जारी रहा, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
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भारत पर प्रभाव: भारत अपनी कच्चा तेल आवश्यकताओं का 80% से अधिक आयात करता है। आपूर्ति में किसी भी बाधा या कीमतों में बढ़ोतरी से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और खुदरा महंगाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
पेंटागन का बड़ा खुलासा: युद्ध पर अब तक $37.5 अरब खर्च
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने पहली बार इस सैन्य संघर्ष की आधिकारिक लागत सार्वजनिक की है:
| मद / विषय | पेंटागन द्वारा जारी आंकड़े / विवरण |
| कुल खर्च (अब तक) | ~$37.5 अरब डॉलर |
| अभियान अवधि | 11 दिन (लगातार हवाई हमले) |
| अतिरिक्त बजट मांग | युद्ध लंबा खींचने पर अमेरिकी कांग्रेस से अतिरिक्त रक्षा बजट की मांग की जा सकती है। |
कूटनीतिक रास्ते बंद, वैश्विक समुदाय की चिंता
अमेरिका और ईरान दोनों ही देशों के कड़े रुख के कारण फिलहाल कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं बेहद कम नजर आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक आर्थिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष और चौड़ा हुआ, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित न रहकर पूरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) को प्रभावित करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. अमेरिका ने ईरान पर 11वीं रात किस आधार पर हमले किए?
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, ईरान के ड्रोन भंडारण केंद्रों और सैन्य ठिकानों पर हमले इसलिए किए गए ताकि क्षेत्रीय समुद्री मार्गों में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर होने वाले संभावित खतरों को बेअसर किया जा सके।
2. इस तनाव का अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और भारत पर क्या असर होगा?
सऊदी अरब और अन्य मध्य-पूर्वी देशों से गुजरने वाले तेल टैंकरों का मार्ग बदलने और होरमुज जलडमरूमध्य में जोखिम बढ़ने से कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इससे भारत जैसे तेल आयातक देशों का आयात बिल बढ़ सकता है।
3. अमेरिका ने इस युद्ध पर अब तक कितना बजट खर्च किया है?
पेंटागन की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के शुरुआती 11 दिनों में ही अमेरिका लगभग 37.5 अरब डॉलर खर्च कर चुका है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय समाचार सूत्रों, आधिकारिक बयानों और प्राथमिक रिपोर्टों पर आधारित है। वैश्विक सैन्य एवं आर्थिक स्थिति में तेजी से हो रहे बदलावों के अनुसार आंकड़े और स्थितियां बदल सकती हैं।
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