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बी. एन. एस. डी. शिक्षा निकेतन में “श्री गणेश मंगलोत्सव”: हल्दी-कुमकुम और मधुर भजनों से भक्तिमय हुआ परिसर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

कानपुर ।

कानपुर के बेनाझावर स्थित प्रतिष्ठित संस्थान बी. एन. एस. डी. शिक्षा निकेतन इण्टर कॉलेज में ‘श्री गणेश मंगलोत्सव’ के अंतर्गत हल्दी-कुमकुम एवं भावपूर्ण भजन कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं के प्रति जन-आस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आपस में प्रेम, सौहार्द और मंगलकामना की भावना को बढ़ावा देना रहा।

 

गणेश वंदना और भक्तिमय भजनों की स्वरलहरी

कार्यक्रम का शुभारंभ विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश के विधि-विधान से स्मरण एवं पूजन-अर्चन के साथ हुआ। तत्पश्चात विद्यालय परिसर में भक्ति संगीत की सरिता बही। शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए भावपूर्ण भजनों की मधुर स्वर-लहरियों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। उपस्थित सभी लोग भक्तिभाव में भाव-विभोर होकर झूमते नज़र आए।

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हल्दीकुमकुम की पारंपरिक रस्म और अखंड सौभाग्य की कामना

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में से एक रहा हल्दीकुमकुम समारोह। इस अवसर पर विद्यालय की शिक्षिकाओं और उपस्थित अभिभाविकाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए एक-दूसरे को हल्दी और कुमकुम लगाया।

भारतीय सनातन परंपरा में हल्दी-कुमकुम का अत्यंत विशेष महत्व है। यह रस्म केवल सौभाग्य, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के बीच आपसी प्रेम, आत्मीयता और सामाजिक सौहार्द को सुदृढ़ करने का एक माध्यम भी है।

 

गरिमामयी उपस्थिति और सांस्कृतिक संदेश

इस मंगलकारी अवसर पर विद्यालय परिवार के कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे:

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  • उपप्रधानाचार्या: मंजूबाला श्रीवास्तव एवं सरला सब्बरवाल
  • वरिष्ठ शिक्षिकाएं: रश्मि मिश्रा जी, शालिनी सिंह जी, जया जी, नीलिमा जी, नीतू दीक्षित, कंचन लता त्रिपाठी, पूर्णिमा जी
  • विद्यालय की समस्त शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में अभिभाविकाएं।

उपस्थित अतिथियों एवं शिक्षिकाओं ने भगवान श्री गणेश से विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य, विद्यालय की उन्नति तथा समस्त परिवारों के सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संस्कृति की इन मंगलकारी परंपराओं को जीवित रखना और इन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाना समय की मुख्य आवश्यकता है।

कार्यक्रम का समापन भगवान गणेश जी की महाआरती, प्रसाद वितरण और विश्व कल्याण की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।

 

  • शैक्षणिक और सांस्कृतिक समाचारों के लिए देखें: Matribhumi Samachar
  • उत्तर प्रदेश के प्रमुख आयोजनों की विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें: Matribhumi Samachar News

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: बी. एन. एस. डी. शिक्षा निकेतन में किस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था?

उत्तर: विद्यालय में ‘श्री गणेश मंगलोत्सव’ के अंतर्गत हल्दी-कुमकुम रस्म तथा भजन संध्या का आयोजन किया गया था।

Q2: भारतीय परंपरा में हल्दीकुमकुम का क्या महत्व है?

उत्तर: हल्दी-कुमकुम को अखंड सौभाग्य, सुख, समृद्धि, पारस्परिक प्रेम और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है।

Q3: इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उत्तर: कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सनातन संस्कृति एवं परंपराओं का संरक्षण करना, विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों का सिंचन करना और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना था।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह लेख बी. एन. एस. डी. शिक्षा निकेतन इण्टर कॉलेज, बेनाझावर (कानपुर) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और प्राप्त सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल सूचनात्मक एवं सांस्कृतिक जागरूकता फैलाना है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।