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कानपुर कचहरी में लगातार छठे हफ्ते वकीलों का कार्य बहिष्कार: एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग पर अड़े अधिवक्ता

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

कानपुर। 

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में अदालती प्रक्रियाएं एक बार फिर पूरी तरह से ठप नजर आईं। कानपुर कचहरी में बार एसोसिएशन और लॉयर्स एसोसिएशन के संयुक्त आह्वान पर अधिवक्ताओं ने बुधवार को लगातार छठे सप्ताह न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए कोर्ट वर्क का पूर्ण बहिष्कार किया। वकीलों के इस कड़े कदम से अदालतों में होने वाला सामान्य कामकाज ठप पड़ गया और दूर-दराज से अपनी तारीखों पर पहुंचे हजारों वादकारियों को निराश होकर बिना किसी सुनवाई के वापस लौटना पड़ा।

 

प्रांतीय सम्मेलन से शुरू हुई रणनीति

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उल्लेखनीय है कि 10 और 11 सितंबर को आयोजित प्रांतीय अधिवक्ता सम्मेलन के दौरान राज्यभर के वकीलों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई थी। इसी सम्मेलन में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि जब तक शासन स्तर पर अधिवक्ताओं की समस्याओं व मांगों का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक प्रत्येक बुधवार को प्रदेशभर में न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया जाएगा। इसी निर्णय के अनुपालन में कानपुर के वकीलों ने 21 अक्टूबर को भी पूरी तरह काम बंद रखकर विरोध दर्ज कराया।

 

न्याय की आस में भटकते रहे वादकारी

वकीलों की हड़ताल और अदालती कार्य बंद रहने से सबसे अधिक प्रभाव दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों व पड़ोसी जिलों से आए मुकदमों के पक्षकारों पर पड़ा। कचहरी पहुंचे पीड़ितों को अपने मुकदमों की पैरवी के बिना केवल अगली तारीख लेकर वापस लौटना पड़ा। लगातार कई सप्ताह से कार्य बहिष्कार के कारण मुकदमों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे न्याय प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।

 

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अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें

कानपुर कचहरी के अधिवक्ताओं का कहना है कि वे सरकार से कोई अनुचित मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं। उनकी प्रमुख मांगों में निम्नलिखित मुद्दे शामिल हैं:

  • एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट का क्रियान्वयन: वकीलों पर लगातार बढ़ रहे हमलों और फर्जी मुकदमों को रोकने के लिए प्रदेश में ‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट’ तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
  • वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन व्यवस्था: आयुसीमा पार कर चुके वरिष्ठ वकीलों के सामाजिक सुरक्षा हेतु सम्मानजनक पेंशन योजना लागू हो।
  • नीतिगत फैसलों में अधिवक्ता सहभागिता: अधिवक्ताओं के हित से जुड़े प्रशासनिक व नीतिगत फैसलों में बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों की राय अनिवार्य की जाए।

 

नवंबर में आंदोलन को और तेज करने की रूपरेखा

लगातार 6 हफ्तों से जारी इस आंदोलन के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल न किए जाने से अधिवक्ताओं में रोष व्याप्त है। बार और लॉयर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर माह में प्रदेशभर के अधिवक्ताओं का विशाल जत्था राजधानी लखनऊ में एकत्र होगा। वहां अधिवक्ता एक ओर जहां मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराएंगे, वहीं दूसरी ओर विधानसभा का घेराव कर सरकार का ध्यान आकृष्ट करेंगे।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: कानपुर कचहरी में वकीलों ने कोर्ट वर्क का बहिष्कार क्यों किया?उत्तर: अधिवक्ता अपनी विभिन्न मांगों, मुख्य रूप से ‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट’ को लागू करने और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना की व्यवस्था की मांग को लेकर कार्य बहिष्कार कर रहे हैं।

Q2: यह हड़ताल कब से और किस शेड्यूल पर चल रही है?उत्तर: सितंबर में आयोजित प्रांतीय अधिवक्ता सम्मेलन के फैसले के तहत अधिवक्ता लगातार पिछले 6 हफ्तों से प्रत्येक बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रह रहे हैं।

Q3: नवंबर में अधिवक्ताओं का अगला कदम क्या होगा?उत्तर: मांगें न पूरी होने की स्थिति में अधिवक्ताओं ने नवंबर में लखनऊ में एकत्र होकर विशाल मानव श्रृंखला बनाने और विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह समाचार लेख विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं बार एसोसिएशन द्वारा जारी जानकारियों के आधार पर केवल सूचनात्मक और जनहित में जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। मुकदमों की अगली तिथियों एवं अदालती प्रक्रियाओं के संबंध में पक्षकार अपने अधिकृत अधिवक्ता से सीधे संपर्क करें।

 

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विस्तृत रिपोर्ट के लिए मातृभूमि समाचार की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।