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“सीन में जज़्बात रोके, शूटिंग खत्म हुई तो रो पड़ा”: अनुपमा के सामने अनिल कपूर ने सुनाया ‘साहेब’ का किस्सा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई, अक्टूबर, 2026: इस वीकेंड, देश की चहेती अनुपमा यानि रुपाली गांगुली, स्टार प्लस के लोकप्रिय गेम शो ‘इंडिया के टॉप 1%’ में अनिल कपूर के साथ नज़र आएँगी। हँसी-मज़ाक और बातचीत के बीच रुपाली का आना अनिल को फिल्म ‘साहेब’ के दिनों में ले जाता है, जिसका निर्देशन उनके पिता अनिल गांगुली ने किया था। फिल्म से जुड़ी यादें साझा करते हुए अनिल इसे अपने करियर का सबसे बेहतरीन काम बताते हैं। साथ ही, वे एक ऐसे भावुक सीन का ज़िक्र करते हैं, जिसकी शूटिंग के बाद वह अपने आँसू रोक नहीं पाए थे।

रुपाली का स्वागत करते हुए अनिल उनके पिता के साथ काम करने के अनुभव को बड़े प्यार से याद करते हैं और फिल्म का मशहूर गाना ‘प्यार बिना चैन कहाँ रे’ भी गुनगुनाते हैं। वे कहते हैं, “अनिल गांगुली जी के साथ मैंने एक सुपरहिट फिल्म की थी, जिसका नाम था ‘साहेब’। वे बहुत अच्छे और प्यारे इंसान थे। लोग मेरी कई फिल्मों में मेरे काम की तारीफ करते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि मेरा सबसे अच्छा काम ‘साहेब’ में था। और आज उनकी बेटी मेरे साथ खड़ी है, जिसने पूरे हिंदुस्तान के घर-घर में अपनी पहचान बना ली है।”

रुपाली भी काम के प्रति अनिल के समर्पण को याद करती हैं और बताती हैं कि उनके पिता अक्सर अनिल की बातें किया करते थे। वे कहती हैं, “सर, पापा हमेशा आपकी बातें करते थे। ‘साहेब’ में आपके पास एक ट्रैकसूट और दो शर्ट थीं, एक सफेद और एक लाल चेक वाली। बहुत सारे कपड़े नहीं थे, लेकिन काम के प्रति आपके समर्पण से हमने बहुत कुछ सीखा है। वह सीन, जिसमें आप पैसे लेकर बैठे हैं और उन्हें लौटाने के लिए नौकरी माँगते हैं, हमारे लिए अपने आप में अभिनय की पूरी पाठशाला था, सर।”

उस सीन को याद करते हुए अनिल कहते हैं, “वे मेरे पसंदीदा सीन्स में से एक है। वह सीन करने के बाद मैं फूट-फूटकर रोया था। सीन में मेरा किरदार अपने जज़्बातों पर काबू रखने की कोशिश कर रहा था, लेकिन शूटिंग खत्म होते ही मैं रो पड़ा। बहुत अच्छा सीन था।”

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देखिए ‘इंडिया के टॉप 1%- द अनिल कपूर शो’, इस वीकेंड रात 8 बजे, स्टार प्लस और जियोहॉटस्टार पर।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।