कुरनूल।
आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के होलागुंडा मण्डल स्थित देवरगट्टू क्षेत्र में विजयदशमी (दशहरा) की रात आयोजित होने वाला प्रसिद्ध बन्नी उत्सव (Banni Utsav) इस बार हिंसक झड़प का शिकार हो गया। श्री माला मल्लेश्वर स्वामी मंदिर परिसर में आधी रात के बाद शुरू हुई पारंपरिक रस्म के दौरान विभिन्न गांवों के श्रद्धालुओं के बीच खूनी संघर्ष छिड़ गया। इस घटना में 28 वर्षीय एक युवक की जान चली गई, जबकि 80 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
‘कर्राला समरम’: क्या है सदियों पुरानी यह परंपरा?
देवरगट्टू में हर साल विजयादशमी की मध्यरात्रि को भगवान माला मल्लेश्वर स्वामी और देवी पार्वती की मूर्तियों को पहाड़ी से नीचे ‘सिंहासन कट्टा’ लाया जाता है। इस दौरान उत्सव मूर्तियों को अपने-अपने गांव ले जाने की होड़ में विभिन्न गांवों (जैसे नेरानिकी, नेरानिकी तांडा, कोठापेटा) के हजारों श्रद्धालु आमने-सामने आ जाते हैं।
स्थानीय भाषा में इसे ‘कर्राला समरम’ (Karrala Samaram) यानी डंडों का युद्ध कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार:
- यह उत्सव भगवान माला मल्लेश्वर स्वामी द्वारा मणी और मल्लासुर नामक राक्षसों के वध का प्रतीक है।
- श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दौरान सिर पर चोट लगना या खून बहना भगवान का आशीर्वाद और शुभ संकेत होता है।
आधी रात के बाद बेकाबू हुई स्थिति
इस वर्ष भी भगवान के कल्याणोत्सव के बाद आधी रात करीब 12 बजे जैसे ही प्रतिमाओं की यात्रा शुरू हुई, श्रद्धालु हाथों में रिंग लगे मजबूत लाठी-डंडे और जलती हुई मशालें लेकर आमने-सामने आ गए।
देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई और श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे पर लाठियों और पत्थरों से हमला करना शुरू कर दिया। इस झड़प में अलूर निवासी 28 वर्षीय पोतुराजू की मौके पर ही मौत हो गई। घायलों को तत्काल अलूर और कुरनूल के सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है।
कड़े सुरक्षा इंतजामों के बावजूद प्रशासन विफल
प्रशासन द्वारा इस हिंसा को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी:
- पुलिस बल: 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
- तकनीकी निगरानी: पूरे पहाड़ी इलाके पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए नजर रखी जा रही थी।
- एहतियाती कदम: उत्सव से पहले पुलिस ने काउंसिलिंग आयोजित की थी और कई हजार डंडों को जब्त भी किया था।
इन तमाम पाबंदियों और सुरक्षा उपायों के बावजूद, धार्मिक आस्था और परंपरा के दबाव में भीड़ बेकाबू हो गई और पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
परंपरा बनाम सार्वजनिक सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
देवरगट्टू के इस खूनी खेल में हर साल दर्जनों लोग घायल होते हैं और कई बार श्रद्धालुओं की जान भी जा चुकी है।
स्थानीय प्रशासन, न्यायपालिका और मानवाधिकार संगठनों द्वारा इस हिंसक रस्म को बंद करने या प्रतीकात्मक रूप से मनाने की कई बार अपील की जा चुकी है, लेकिन ग्रामीणों की गहरी आस्था के कारण हर साल यह रक्तपात दोहराया जाता है। इस दर्दनाक हादसे के बाद एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और जन-सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1: बन्नी उत्सव (Banni Utsav) कहाँ आयोजित किया जाता है?
उत्तर: यह उत्सव आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के होलागुंडा मण्डल स्थित देवरगट्टू के श्री माला मल्लेश्वर स्वामी मंदिर में आयोजित होता है।
Q2: ‘कर्राला समरम’ (Karrala Samaram) का क्या अर्थ है?
उत्तर: यह एक स्थानीय पारंपरिक रस्म है जिसका अर्थ ‘डंडों का युद्ध’ होता है। इसमें श्रद्धालु हाथों में मजबूत लाठियाँ लेकर भगवान की प्रतिमा को अपने गांव ले जाने की प्रतियोगिता करते हैं।
Q3: बन्नी उत्सव किस धार्मिक घटना का प्रतीक है?
उत्तर: मान्यताओं के अनुसार, यह उत्सव राक्षसों (मणी और मल्लासुर) पर भगवान माला मल्लेश्वर स्वामी और देवी पार्वती की विजय का प्रतीक माना जाता है।
Disclaimer
यह समाचार रिपोर्ट स्थानीय प्रशासनिक जानकारियों, पुलिस बयानों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। हमारा उद्देश्य किसी भी धार्मिक आस्था या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है, बल्कि केवल जन–हित में घटना की तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत करना है।
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