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शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट: पश्चिम एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
6 Min Read

मुंबई।

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार तीसरे कारोबार सत्र में मंदी का रुख देखने को मिला। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। महंगे कच्चे तेल के कारण देश में महंगाई (Inflation) बढ़ने और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में नरमी की उम्मीदों को झटका लगने की आशंका से बाजार पर चौतरफा बिकवाली का दबाव बना रहा।

 

सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट

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कारोबार समाप्त होने पर बीएसई (BSE) का 30 शेयरों वाला प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 460.30 अंक (0.62%) गिरकर 73,249.39 के स्तर पर बंद हुआ। दिन के कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स में करीब 705 अंकों तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।

इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 123.70 अंक (0.54%) की कमजोरी के साथ 22,687.65 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया।

 

क्यों टूटा शेयर बाजार? जानिए गिरावट के मुख्य कारण

कच्चे तेल (Brent Crude) में तेज उछाल:

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल महंगा होने से देश का आयात बिल (Import Bill) बढ़ता है, जिससे अर्थव्यवस्था और रुपये की विनिमय दर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

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महंगाई बढ़ने की आशंका:

कच्चे तेल के दाम बढ़ने का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। माल ढुलाई और उत्पादन लागत बढ़ने से दैनिक उपभोग की वस्तुओं और सेवाओं के दाम भी बढ़ जाते हैं, जिससे आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई (CPI Inflation) बढ़ने का जोखिम रहता है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति पर नजर:

महंगाई का दबाव बना रहने पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास नीतिगत ब्याज दरों (Repo Rate) में कटौती करने की गुंजाइश सीमित हो जाएगी। उच्च ब्याज दरें कंपनियों की उधारी लागत बढ़ाती हैं और उपभोक्ता मांग को प्रभावित करती हैं।

विदेशी निवेशकों (FIIs) का रुख:

वैश्विक अनिश्चितता के दौर में विदेशी संस्थागत निवेशक जोखिम भरे परिसंपत्तियों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों (जैसे सोना या अमेरिकी डॉलर) में शिफ्ट करते हैं।

 

सेक्टर–वार हाल: किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल?

गुरुवार के सत्र में बाजार के लगभग सभी प्रमुख सेक्टर्स में बिकवाली देखी गई:

  • दबाव वाले सेक्टर्स: सूचना प्रौद्योगिकी (IT), एफएमसीजी (FMCG), ऊर्जा (Energy), ऑटोमोबाइल और तेल-गैस क्षेत्र के शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे।
  • मिडकैप और स्मॉलकैप: मझोली और छोटी कंपनियों के सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों ने अनिश्चितता के माहौल में मुनाफावसूली करना उचित समझा।
  • प्रमुख कमजोर शेयर: रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, एटरनल, पावर ग्रिड, ट्रेंट, एशियन पेंट्स और इंफोसिस जैसे दिग्गज शेयरों में बिकवाली रही।
  • सपोर्ट देने वाले शेयर: बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और सन फार्मा जैसे शेयरों ने बढ़त बनाकर बाजार को और अधिक गिरने से बचाने का प्रयास किया।

 

मौजूदा माहौल में निवेशकों के लिए रणनीति

बाजार में बढ़े हुए उतार-चढ़ाव (Volatility) के बीच जानकारों का मानना है कि केवल एक-दो दिन की हलचल के आधार पर पैनिक में आकर शेयर बेचने (Panic Selling) से बचना चाहिए।

  • SIP जारी रखें: म्यूचुअल फंड निवेशकों को अपनी नियमित एसआईपी (SIP) जारी रखनी चाहिए, ताकि बाजार के निचले स्तर पर ‘रुपया कॉस्ट एवरेजिंग’ का लाभ मिल सके।
  • गुणवत्ता पर ध्यान दें: मजबूत बैलेंस शीट, कम कर्ज और स्थिर कैश फ्लो वाली कंपनियों के फंडामेंटल्स पर ध्यान दें।
  • एसेट एलोकेशन बनाए रखें: इक्विटी के साथ-साथ डेट (Fixed Income) और गोल्ड (Gold) में निवेश का संतुलन बनाए रखें।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

शेयर बाजार में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आया तेज उछाल गिरावट का मुख्य कारण है। इससे भारत में महंगाई बढ़ने और आर्थिक वृद्धि प्रभावित होने की आशंका है।

कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार क्यों प्रभावित होता है?

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। कच्चा तेल महंगा होने से भारत का आयात खर्च बढ़ता है, जिससे रुपया कमजोर होता है और देश में परिवहन तथा उत्पादन लागत बढ़ने से महंगाई बढ़ती है।

क्या इस गिरावट में शेयर बेच देना चाहिए?

नहीं, भू-राजनीतिक तनाव के कारण आने वाली गिरावट आमतौर पर अस्थायी होती है। पैनिक में बेचने के बजाय फंडामेंटली मजबूत कंपनियों और म्यूचुअल फंड एसआईपी (SIP) में लंबी अवधि के लिए बने रहना चाहिए।

 

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। इसे किसी भी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार (SEBI Registered Financial Advisor) से परामर्श अवश्य करें।

 

अपडेट्स के लिए विजिट करें: मातृभूमि समाचार – मुख्य पृष्ठ

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।