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अब कहिए ‘डॉक्टर’ हिटमैन: रोहित शर्मा को मानद डॉक्टरेट की उपाधि, क्रिकेट के मैदान से शिक्षा के मंच तक का सफर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के ‘हिटमैन’ अब आधिकारिक तौर पर ‘डॉक्टर’ बन गए हैं। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा को खेल में उनके अतुलनीय योगदान और असाधारण नेतृत्व क्षमता के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजा गया है।

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 24 जनवरी 2026 की तारीख एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रही है। पुणे की प्रतिष्ठित अजींक्या डीवाई पाटिल यूनिवर्सिटी (ADYPU) ने अपने 10वें दीक्षांत समारोह में भारतीय दिग्गज बल्लेबाज और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा को ‘डॉक्टर ऑफ लिटरेचर’ (D.Litt.) की मानद उपाधि देने की घोषणा की है।

? उपलब्धि का आधार: केवल रन नहीं, नेतृत्व भी

यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. अजींक्या डीवाई पाटिल के अनुसार, यह सम्मान केवल रोहित के बल्ले से निकले रनों के लिए नहीं, बल्कि उनकी रणनीतिक सूझबूझ (Strategy) और धैर्य (Resilience) के लिए दिया गया है।

  • वर्ल्ड कप गौरव: रोहित की कप्तानी में भारत ने टी20 विश्व कप 2024 और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 जीतकर विश्व मंच पर तिरंगा लहराया।

  • लीडरशिप का ‘रोहित मॉडल’: रोहित ने न केवल टीम को जिताया, बल्कि युवाओं को अपनी कप्तानी में फलने-फूलने का मौका दिया। उनकी यही ‘एग्जेंप्लरी लीडरशिप’ आज के स्नातकों के लिए केस स्टडी बन चुकी है।

? सम्मान समारोह की झलकियाँ

  • दिनांक: 24 जनवरी 2026 (शनिवार)

  • स्थान: ADYPU कैंपस, डीवाई पाटिल नॉलेज सिटी, पुणे।

  • मुख्य अतिथि: महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत दादा पाटिल।

  • विशेष आकर्षण: फिल्म ‘चक दे इंडिया’ फेम अभिनेत्री विद्या मालवड़े इस समारोह का संचालन करेंगी।

? एक नई पारी की शुरुआत

38 वर्षीय रोहित शर्मा ने हाल ही में टेस्ट और टी20 फॉर्मेट से संन्यास लिया है, लेकिन वे वनडे क्रिकेट में अब भी टीम इंडिया का नेतृत्व कर रहे हैं। यह डॉक्टरेट की उपाधि उनके करियर में एक ऐसा मील का पत्थर है, जो उन्हें सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली जैसे दिग्गजों की श्रेणी में खड़ा करती है, जिन्हें खेल के इतर भी बड़े अकादमिक सम्मान मिले हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।