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अनिल अंबानी पर SC सख्त: बैंकिंग धोखाधड़ी केस में अंतिम नोटिस, 10 दिन में CBI-ED देंगे रिपोर्ट

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उद्योगपति अनिल अंबानी और रिलायंस ग्रुप का लोगो।

मुंबई. उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट और बैंकिंग धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे अनिल अंबानी और उनके अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) को सुप्रीम कोर्ट ने आज एक नया और सख्त नोटिस जारी किया है।

अनिल अंबानी और उनके समूह (ADAG) के लिए आज यानी 23 जनवरी 2026 का दिन कानूनी रूप से काफी भारी रहा। सुप्रीम कोर्ट ने कथित बैंकिंग धोखाधड़ी मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए उद्योगपति को “अंतिम मौका” दिया है।

🛑 कोर्ट की ‘अंतिम चेतावनी’

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अनिल अंबानी और उनके समूह के पास जवाब दाखिल करने का यह आखिरी मौका है।

  • क्या है मामला: पूर्व केंद्रीय सचिव ई.ए.एस. शर्मा द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और अन्य समूह कंपनियों ने बैंकों के साथ ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी की है।

  • नोटिस की तामील: कोर्ट ने पाया कि पिछले साल 18 नवंबर को नोटिस जारी होने के बावजूद अंबानी की तरफ से कोई पेश नहीं हुआ। अब बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि यह नोटिस निजी तौर पर अनिल अंबानी को तामील कराया जाए।

🔍 CBI और ED को 10 दिन का समय

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केवल अंबानी ही नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों पर भी सख्ती दिखाई है। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की दलीलों को सुनते हुए कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. स्टेटस रिपोर्ट: सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अगले 10 दिनों के भीतर एक सीलबंद लिफाफे में जांच की प्रगति रिपोर्ट (Status Report) सौंपनी होगी।

  2. बैंक अधिकारियों की भूमिका: याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस धोखाधड़ी में बैंक अधिकारियों की भी मिलीभगत थी। कोर्ट अब यह देखना चाहता है कि क्या एजेंसियां इन “लोक सेवकों” की जांच कर रही हैं या नहीं।

📉 भारत का सबसे बड़ा ‘कॉर्पोरेट घोटाला’?

याचिकाकर्ता की ओर से पेश प्रशांत भूषण ने इसे “भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट फ्रॉड” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2007-08 से ही शेल कंपनियों के जरिए सार्वजनिक धन की हेराफेरी की जा रही थी, लेकिन सीबीआई ने इसमें 2025 में जाकर एफआईआर दर्ज की।

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