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दिल्ली-एनसीआर में पहली बार बड़े पैमाने पर होगा ‘रंगीला बिहार’, पवन सिंह करेंगे अगुवाई

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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टिकटेड भोजपुरी लाइव इवेंट के रूप में ‘रंगीला बिहार’ इस फरवरी राजधानी क्षेत्र में अपनी शुरुआत कर रहा है।

दिल्ली-एनसीआर, भारत

भोजपुरी संगीत और बिहार की सांस्कृतिक पहचान को एक नए मंच पर प्रस्तुत करने जा रहा ‘रंगीला बिहार’ इस फरवरी दिल्ली-एनसीआर में आयोजित होने जा रहा है। यह आयोजन राजधानी क्षेत्र में इस पैमाने का पहला टिकटेड भोजपुरी लाइव इवेंट होगा, जिसमें संगीत, प्रस्तुति और सांस्कृतिक उत्सव एक साथ देखने को मिलेगा।

पवन सिंह मुख्य कलाकार के रूप में ‘रंगीला बिहार’ में नजर आएंगे, भोजपुरी संगीत और संस्कृति का लाइव आयोजन दिल्ली-एनसीआर में।

Rangeela Events के अंतर्गत तैयार किया गया ‘रंगीला बिहार’ एक ऐसा लाइव-इवेंट कॉन्सेप्ट है, जिसका उद्देश्य भोजपुरी संगीत और संस्कृति को बड़े स्तर पर, आधुनिक प्रस्तुति के साथ दर्शकों तक पहुँचाना है।

इस आयोजन के पहले संस्करण की अगुवाई भोजपुरी सिनेमा के पावरस्टार पवन सिंह करेंगे। उनके साथ मंच पर श्वेता महारा, विनय तिवारी और खुशी कक्कड़ भी अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे, जिससे यह आयोजन भोजपुरी संगीत की विविधता और लोकप्रियता को एक साथ सामने लाएगा।

आयोजन को लेकर पवन सिंह ने कहा, “रंगीला बिहार सिर्फ़ एक कॉन्सर्ट नहीं है, यह हमारी जड़ों और हमारी संस्कृति के सफ़र का उत्सव है।”

‘रंगीला बिहार’ का उद्देश्य केवल एक संगीत कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि एक ऐसा सांस्कृतिक मंच तैयार करना है, जहाँ दिल्ली-एनसीआर में रहने वाला भोजपुरी-भाषी समुदाय अपनी पहचान और जुड़ाव को महसूस कर सके, और नई पीढ़ी को भी भोजपुरी संगीत और संस्कृति से जोड़ सके।

‘रंगीला बिहार’ का पहला संस्करण 21 फरवरी 2026 को दिल्ली-एनसीआर में आयोजित किया जाएगा।
इस आयोजन के टिकट केवल RangeelaEvents.com पर उपलब्ध होंगे।

रंगीला बिहार के बारे में
‘रंगीला बिहार’ एक लाइव-इवेंट कॉन्सेप्ट है, जिसे भविष्य में एक नियमित सांस्कृतिक मंच के रूप में विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य बिहार की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और भोजपुरी संगीत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है।

इस आयोजन की परिकल्पना और क्यूरेशन Fourth Wall द्वारा की गई है, जो संस्कृति, मीडिया और लाइव अनुभवों के क्षेत्र में कार्यरत एक बहु-विषयक समूह है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।